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लोक संस्कृति के प्रचार प्रसार पर दिया जोर
Updated Mon, 06 Aug 2018 02:44 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
माक्टी पोखरी गांव में लोक पंचायत की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कर्मी चिंतन शिविर में जौनसार बावर की लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। सांस्कृतिक कलाकारों को एक मंच पर लाने के लिए लोक सांस्कृतिक संरक्षण समिति का गठन किया गया। निर्णय लिया गया कि संस्कृति के संवर्धन के लिए वर्ष में एक दिन लोक महोत्सव मनाया जाएगा।
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति से दूर होती जा रही है। दूसरे प्रदेशों में रहने वाले बच्चे आज जौनसारी बोलना तक नहीं जानते। जिन्हें संस्कृति से जोड़े रखने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार की जरूरत है। कहा युवा अपनी संस्कृति के करीब आ सके। इसके लिए लोक संस्कृति के संवर्धन की जरूरत है। जिसके लिए सभी को मिल कर काम करना चाहिए। कहा क्षेत्र में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी कलाकारों को न बुला कर क्षेत्रीय कलाकारों को तरजीह देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जौनसार बावर का प्रवेश द्वार हरिपुर कभी हरिद्वार की तरह वैभव संपन्न था। जिसे आज वापस उसी स्वरूप में लाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।
इस मौके पर शांति वर्मा, अज्जू तोमर, अतर शाह, देवेंद्र सिंह रावत, सीताराम चौहान, सीताराम शर्मा, श्याम कुंवर, बारू निराला, सनी दयाल, मनोज कुमार, कुंपाल भारती, किरण डिमरी, महेंद्र सिंह राठौर, कुुंदन सिंह चौहान, भीम सिंह चौहान, महावीर सिंह नेगी, सूर्यवीर सिंह तोमर, अनिल तोमर, सतपाल चौहान, प्रदीप वर्मा, गंभीर सिंह चौहान, सुनील बिष्ट, पं. केशवराज, टीकाराम शाह, नारायण दत्त जोशी, चतर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
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माक्टी पोखरी गांव में लोक पंचायत की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कर्मी चिंतन शिविर में जौनसार बावर की लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। सांस्कृतिक कलाकारों को एक मंच पर लाने के लिए लोक सांस्कृतिक संरक्षण समिति का गठन किया गया। निर्णय लिया गया कि संस्कृति के संवर्धन के लिए वर्ष में एक दिन लोक महोत्सव मनाया जाएगा।
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति से दूर होती जा रही है। दूसरे प्रदेशों में रहने वाले बच्चे आज जौनसारी बोलना तक नहीं जानते। जिन्हें संस्कृति से जोड़े रखने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार की जरूरत है। कहा युवा अपनी संस्कृति के करीब आ सके। इसके लिए लोक संस्कृति के संवर्धन की जरूरत है। जिसके लिए सभी को मिल कर काम करना चाहिए। कहा क्षेत्र में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी कलाकारों को न बुला कर क्षेत्रीय कलाकारों को तरजीह देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जौनसार बावर का प्रवेश द्वार हरिपुर कभी हरिद्वार की तरह वैभव संपन्न था। जिसे आज वापस उसी स्वरूप में लाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।
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इस मौके पर शांति वर्मा, अज्जू तोमर, अतर शाह, देवेंद्र सिंह रावत, सीताराम चौहान, सीताराम शर्मा, श्याम कुंवर, बारू निराला, सनी दयाल, मनोज कुमार, कुंपाल भारती, किरण डिमरी, महेंद्र सिंह राठौर, कुुंदन सिंह चौहान, भीम सिंह चौहान, महावीर सिंह नेगी, सूर्यवीर सिंह तोमर, अनिल तोमर, सतपाल चौहान, प्रदीप वर्मा, गंभीर सिंह चौहान, सुनील बिष्ट, पं. केशवराज, टीकाराम शाह, नारायण दत्त जोशी, चतर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
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