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चमोली में आफत का सबब बनी मानसून की बारिश-compat
Updated Mon, 23 Jul 2018 10:24 PM IST
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गोपेश्वर। चमोली जिले के थराली, देवाल, घाट और दशोली क्षेत्र में पैदल पुलों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण गाड़-गदेरों पर बल्लियां बिछाकर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत वाण, कुलिंग और घाट क्षेत्र में बनी हुई है। लोनिवि कर्णप्रयाग के अधीन चुफलागाड़ पर निर्मित पैदल पुल क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है, ग्रामीण बल्लियों के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। वाण गांव के बुरुकोट गदेरे में 15 जुलाई की रात को बादल फटा था, जिससे क्षेत्र में आवाजाही के पांच छोटे-बड़े पैदल पुल बह गए हैं। ग्रामीण लोहाजंग बाजार तक पहुंचने के लिए बीस किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रहे हैं। यहां वाण-लोहाजंग मोटर मार्ग पर कुलिंग और बुरुकोट गदेरे में मोटर पुल बह गए हैं, जिससे यहां वाहनों की आवाजाही भी ठप पड़ी हुई है। 15 जुलाई को ही घाट क्षेत्र के आपदा प्रभावित कुंडी और मोखबगड़ गांव में बरसाती गदेरे में बादल फटने से क्षेत्र में तीन पैदल पुलिया बह गईं थीं, लेकिन प्रशासन की ओर से आवाजाही की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई है। कुंडी गांव के ग्रामीणों द्वारा स्वयं गदेरे में लकड़ी की बल्लियां बिछाकर आवाजाही की जा रही है। विधायक प्रतिनिधि कृष्णा बिष्ट और कुंवर सिंह बिष्ट का कहना है कि जगह-जगह पुल क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित वाण गांव तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं।
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जिले के आपदा प्रभावित गांवों में तीन माह तक का एडवांस राशन भिजवाया गया है। लोनिवि अधिकारियों को क्षतिग्रस्त और बह गए पुलों के निर्माण के लिए इस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। वाण गांव में बुरुकोट गदेरे का जलस्तर कम होने के बाद यहां क्षतिग्रस्त मोटर पुल के स्थान पर आवाजाही की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
-मोहन सिंह बर्निया, अपर जिलाधिकारी, चमोली
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जिले के आपदा प्रभावित गांवों में तीन माह तक का एडवांस राशन भिजवाया गया है। लोनिवि अधिकारियों को क्षतिग्रस्त और बह गए पुलों के निर्माण के लिए इस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। वाण गांव में बुरुकोट गदेरे का जलस्तर कम होने के बाद यहां क्षतिग्रस्त मोटर पुल के स्थान पर आवाजाही की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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-मोहन सिंह बर्निया, अपर जिलाधिकारी, चमोली