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काश्तकारों को प्राकृतिक संसाधनों से खाद बनाने का दिया प्रशिक्षण
Updated Mon, 23 Jul 2018 10:24 PM IST
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गोपेश्वर। नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की ओर से जिला पंचायत सभागार में जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग योजना पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में काश्तकारों को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खाद बनाने और उत्पादन में वृद्धि करने के बारे में बताया गया।
मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने कहा कि जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में काश्तकार अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उत्तराखंड में जैव विविधता की कमी नहीं है। यहां नेचुरल फार्मिंग से काश्तकार अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं। कार्यक्रम संयोजक नाबार्ड के डीडीएम अभिषेक कापरी ने कहा कि नेचुरल फार्मिंग में काश्तकारों को प्रकृति रूप से उपलब्ध संसाधनों जैसे पौधों की पत्तियां, गोबर, पेड़ों के जीवाश्म से खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे काश्तकार रासायनिक खाद के बजाय स्वयं उत्पादित खाद का उपयोग कर सकेंगे। श्री श्री इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी बंगलूरू की प्रशिक्षिका वेला गोलवाला ने काश्तकारों को जीवाश्म से खाद बनाने की विधि के बारे में बताया। इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी आरएल चंद्रवाल, नरेंद्र यादव, डा. लोकेश कुमार, राम कुमार और प्रतीम भट्ट आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक कृषि अधिकारी जितेंद्र भास्कर ने किया।
मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने कहा कि जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में काश्तकार अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उत्तराखंड में जैव विविधता की कमी नहीं है। यहां नेचुरल फार्मिंग से काश्तकार अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं। कार्यक्रम संयोजक नाबार्ड के डीडीएम अभिषेक कापरी ने कहा कि नेचुरल फार्मिंग में काश्तकारों को प्रकृति रूप से उपलब्ध संसाधनों जैसे पौधों की पत्तियां, गोबर, पेड़ों के जीवाश्म से खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे काश्तकार रासायनिक खाद के बजाय स्वयं उत्पादित खाद का उपयोग कर सकेंगे। श्री श्री इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी बंगलूरू की प्रशिक्षिका वेला गोलवाला ने काश्तकारों को जीवाश्म से खाद बनाने की विधि के बारे में बताया। इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी आरएल चंद्रवाल, नरेंद्र यादव, डा. लोकेश कुमार, राम कुमार और प्रतीम भट्ट आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक कृषि अधिकारी जितेंद्र भास्कर ने किया।
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