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लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका ने छात्र-छात्राओं के साथ अनुभव किए साझा
Updated Fri, 29 Jun 2018 10:24 PM IST
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श्रीनगर। भारतीय नौ सेना के महत्वाकांक्षी नाविका सागर परिक्रमा अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर लौटी लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने छात्रों को नौ सेना में जाने के टिप्स दिए। अभियान के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ की लड़कियां मानसिक रूप से सुदृढ़ होती है। यदि वह लक्ष्य को निर्धारित कर आगे बढ़े, तो उनके लिए सब संभव है।
शुक्रवार को तक्षशिला अकादमी पहुंचीं लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने अभियान के अनुभव छात्रों के साथ साझा किए। छात्रों ने भी उनसे सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया। वर्तिका लगभग साढ़े आठ माह का अभियान पूरा कर अपने गृह जनपद पौड़ी लौटी। इस अभियान में छह महिला नौ सेना अधिकारी शामिल थीं, जिन्होंने पाल नौका आईएनएसवी (इंडियन नेवल सेलिंग वेसल) तारणी से 21,600 नॉटिकल मील का सफर तय कर पूरी दुनिया का चक्कर लगाया। इस अभियान का नेतृत्व वर्तिका ने किया। उनके अनुभवों को साझा करने के लिए तक्षशिला आईएएस अकादमी ने मोटिवेशनल वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें वर्तिका ने बताया कि समुद्र के मौसम का कोई भरोसा नहीं रहता है। यहां हर समय मौत से सामना होता है। ऐसे में मानसिक दृढ़ता, साहस, हौसला, परिपक्वता और सोचने-समझने की शक्ति काम आती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की लड़कियां मानसिक रुप से दृढ़ होती है। यदि वह लक्ष्य को निर्धारित कर आगे बढ़ें, तो उनके लिए सब संभव है। छात्राओं ने वर्तिका से पूछा कि दल ने समुद्री अभियान के दौरान शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक सामंजस्य कैसे बनाए रखा? जिस पर उन्होंने बताया कि टीम भावना से हर मुश्किल काम आसान हो गया। इस अवसर पर अकादमी निदेशक डा. नवीन नौटियाल और उनकी टीम ने वर्तिका को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन नवीन चमोली ने किया।
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शुक्रवार को तक्षशिला अकादमी पहुंचीं लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने अभियान के अनुभव छात्रों के साथ साझा किए। छात्रों ने भी उनसे सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया। वर्तिका लगभग साढ़े आठ माह का अभियान पूरा कर अपने गृह जनपद पौड़ी लौटी। इस अभियान में छह महिला नौ सेना अधिकारी शामिल थीं, जिन्होंने पाल नौका आईएनएसवी (इंडियन नेवल सेलिंग वेसल) तारणी से 21,600 नॉटिकल मील का सफर तय कर पूरी दुनिया का चक्कर लगाया। इस अभियान का नेतृत्व वर्तिका ने किया। उनके अनुभवों को साझा करने के लिए तक्षशिला आईएएस अकादमी ने मोटिवेशनल वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें वर्तिका ने बताया कि समुद्र के मौसम का कोई भरोसा नहीं रहता है। यहां हर समय मौत से सामना होता है। ऐसे में मानसिक दृढ़ता, साहस, हौसला, परिपक्वता और सोचने-समझने की शक्ति काम आती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की लड़कियां मानसिक रुप से दृढ़ होती है। यदि वह लक्ष्य को निर्धारित कर आगे बढ़ें, तो उनके लिए सब संभव है। छात्राओं ने वर्तिका से पूछा कि दल ने समुद्री अभियान के दौरान शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक सामंजस्य कैसे बनाए रखा? जिस पर उन्होंने बताया कि टीम भावना से हर मुश्किल काम आसान हो गया। इस अवसर पर अकादमी निदेशक डा. नवीन नौटियाल और उनकी टीम ने वर्तिका को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन नवीन चमोली ने किया।
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