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जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे नौनिहाल
Updated Tue, 05 Jun 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
चकराता। तहसील के मयरावना गांव स्थित प्राइमरी स्कूल को डेढ़ दशक बाद भी भवन उपलब्ध नहीं हो सका है। वर्तमान में जिस स्कूल भवन में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, वह बेहद जर्जर है। बरसात होने पर उसके गिरने का डर रहा है। बच्चे यहां खतरा होने के बावजूूद जान जोखिम में डालकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। भवन निर्माण की मांग को लेकर अभिभावकों ने मुख्य शिक्षाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में अभिभावकों ने अवगत कराया कि डेढ़ दशक पूर्व स्कूल का भवन निष्प्रोज्य हो गया था। जिसके बाद कई सालों तक स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में संचालित होता रहा। सात साल पूर्व स्कूल को आंगनबाड़ी केंद्र से हाईस्कूल के जर्जर हाल भवन में शिफ्ट कर दिया गया। जिसके बाद से स्कूल इसी भवन में संचालित हो रहा है। भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं। बरसात में छत टपकने लगती है। इससे भवन के गिरने की आशंका बढ़ जाती है, जिसके चलते छात्रों की छुट्टी करनी पड़ जाती है। भवन निर्माण की मांग के संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया लेकिन हर बार बजट कमी बताकर मामले से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि जर्जर भवन की हालत को देखते हुए बाहर खुले में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। पहले स्कूल में 80 छात्र अध्ययनरत थे, लेकिन स्कूल की जर्जर हालत को देखते हुए धीरे-धीरे अभिभावकों ने अपने बच्चों को यहां से निकालना शुरू कर दिया। वर्तमान में यहां 36 बच्चे ही रह गए हैं। ज्ञापन भेजने वालों में टीकाराम जोशी, सुनील जोशी, महेंद्र, रितेश, शोभाराम, सियाराम, चमन, अमित, कुंदन आदि शामिल हैं।
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चकराता। तहसील के मयरावना गांव स्थित प्राइमरी स्कूल को डेढ़ दशक बाद भी भवन उपलब्ध नहीं हो सका है। वर्तमान में जिस स्कूल भवन में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, वह बेहद जर्जर है। बरसात होने पर उसके गिरने का डर रहा है। बच्चे यहां खतरा होने के बावजूूद जान जोखिम में डालकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। भवन निर्माण की मांग को लेकर अभिभावकों ने मुख्य शिक्षाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में अभिभावकों ने अवगत कराया कि डेढ़ दशक पूर्व स्कूल का भवन निष्प्रोज्य हो गया था। जिसके बाद कई सालों तक स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में संचालित होता रहा। सात साल पूर्व स्कूल को आंगनबाड़ी केंद्र से हाईस्कूल के जर्जर हाल भवन में शिफ्ट कर दिया गया। जिसके बाद से स्कूल इसी भवन में संचालित हो रहा है। भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं। बरसात में छत टपकने लगती है। इससे भवन के गिरने की आशंका बढ़ जाती है, जिसके चलते छात्रों की छुट्टी करनी पड़ जाती है। भवन निर्माण की मांग के संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया लेकिन हर बार बजट कमी बताकर मामले से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
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अभिभावकों का कहना है कि जर्जर भवन की हालत को देखते हुए बाहर खुले में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। पहले स्कूल में 80 छात्र अध्ययनरत थे, लेकिन स्कूल की जर्जर हालत को देखते हुए धीरे-धीरे अभिभावकों ने अपने बच्चों को यहां से निकालना शुरू कर दिया। वर्तमान में यहां 36 बच्चे ही रह गए हैं। ज्ञापन भेजने वालों में टीकाराम जोशी, सुनील जोशी, महेंद्र, रितेश, शोभाराम, सियाराम, चमन, अमित, कुंदन आदि शामिल हैं।
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