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भारतीय संस्कृति विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति है
Updated Wed, 30 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
परमार्थ निकेतन गंगा तट पर पर्यावरण व मोक्षदायिनी गंगा के संवर्धन के निमित्त आयोजित श्रीराम कथा में मंगलवार को सूबे के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद व दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्रीनिवास गोयल ने शिरकत की व दिव्य कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर कथावाचक मुरलीधर ने कहा कि मानस ग्रंथ में जीवन की सभी जटिल गुत्थियों का समाधान निहित है। जीव जगत को मानस ग्रंथ से जीवन में मर्यादा का पालन करने की सीख लेनी चाहिए।
उधर, आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने ऋषिकेश और हरिद्वार के सौंदर्यीकरण, गंगा तटों की स्वच्छता आदि विषयों पर चर्चा की। स्वामी चिदानंद मुनि ने गंगा के तटों पर जैविक और अजैविक कूड़ेदान लगाए जाने पर जोर दिया, जिससे मोक्षदायिनी गंगा में बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की धरती ने हमेशा स्वच्छता व शुद्ध पर्यावरण का संदेश दिया है। कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति है, इसलिए पूरे विश्व से सैलानियों को आकर्षित करती है। कथावाचक मुरलीधर ने कहा कि साधना की सार्थकता के लिए श्रेष्ठ वातावरण की जरूरत होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से व्यास पीठ से दिए जा रहे स्वच्छता संबंधी संदेश को आत्मसात करने को कहा।
इस अवसर पर काबीना मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए सबको मिलकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वामी चिदानंद मुनि की ओर से चलाए जा रहे अभियान में सहभागिता की अपील की। कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा लगाने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
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परमार्थ निकेतन गंगा तट पर पर्यावरण व मोक्षदायिनी गंगा के संवर्धन के निमित्त आयोजित श्रीराम कथा में मंगलवार को सूबे के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद व दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्रीनिवास गोयल ने शिरकत की व दिव्य कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर कथावाचक मुरलीधर ने कहा कि मानस ग्रंथ में जीवन की सभी जटिल गुत्थियों का समाधान निहित है। जीव जगत को मानस ग्रंथ से जीवन में मर्यादा का पालन करने की सीख लेनी चाहिए।
उधर, आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने ऋषिकेश और हरिद्वार के सौंदर्यीकरण, गंगा तटों की स्वच्छता आदि विषयों पर चर्चा की। स्वामी चिदानंद मुनि ने गंगा के तटों पर जैविक और अजैविक कूड़ेदान लगाए जाने पर जोर दिया, जिससे मोक्षदायिनी गंगा में बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की धरती ने हमेशा स्वच्छता व शुद्ध पर्यावरण का संदेश दिया है। कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति है, इसलिए पूरे विश्व से सैलानियों को आकर्षित करती है। कथावाचक मुरलीधर ने कहा कि साधना की सार्थकता के लिए श्रेष्ठ वातावरण की जरूरत होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से व्यास पीठ से दिए जा रहे स्वच्छता संबंधी संदेश को आत्मसात करने को कहा।
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इस अवसर पर काबीना मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए सबको मिलकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वामी चिदानंद मुनि की ओर से चलाए जा रहे अभियान में सहभागिता की अपील की। कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा लगाने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
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