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दो माह से अनुपस्थित चल रहा शिक्षक
Updated Thu, 26 Apr 2018 02:20 AM IST
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शिक्षक तैनात न होने पर अभिभावकों ने दी परीक्षा न होने देने की चेतावनी
ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
जीआईसी कोरूवा में तैनात सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षक दो माह से अनुपस्थित चल रहे हैं। इसके चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों में रोष है। उन्होंने शुक्रवार को मिशन कोशिश के तहत आयोजित होने वाली सामाजिक विज्ञान विषय की परीक्षा को न होने देने की चेतावनी दी है।
जीआईसी कोरूवा स्कूल में 120 छात्र अध्ययनरत हैं। अभिभावकों का आरोप है कि पूर्व में शिक्षक को जिला शिक्षाधिकारी के यहां अटैच किया गया था, लेकिन अभिभावकों के हंगामे के बाद उन्हें दुबारा से स्कूल में भेज दिया गया। बीते दो माह से शिक्षक स्कूल नहीं आ रहे हैं। शिक्षक की यह मनमर्जी छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। उन्हें मॉडल और गाइडों के सहारे भविष्य संवारना पड़ रहा है। मुख्य शिक्षाधिकारी से शिकायत के बावजूद शिक्षक की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आ रहा है। पीटीए अध्यक्ष दयापाल सिंह, एसएमसी अध्यक्ष अर्जुन सिंह तोमर, वीरेंद्र सिंह तोमर, संतन सिंह, विक्रम सिंह तोमर आदि का कहना है कि विभागीय उदासीनता के चलते ही अभिभावकों ने परीक्षा न होने देने का निर्णय लिया है। जरूरत पड़ी तो अभिभावकों को स्कूल में तालाबंदी को भी बाध्य होना पड़ेगा।
मुख्य शिक्षाधिकारी एसपी जोशी ने बताया कि यदि शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे हैं तो उनका वेतन रोका जाएगा। सोमवार तक स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिक्षक की तैनाती कर दी जाएगी।
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क्या है मिशन कोशिश
सरकारी स्कूलों के छात्रों की दक्षता को निखारने के लिए शिक्षा विभाग ने मिशन कोशिश शुरू किया है। एक अप्रैल शुरू होकर 30 मई तक चलने वाले मिशन कोशिश कार्यक्रम में छात्रों को कई अहम जानकारियां देकर उनके ज्ञान को निखारा जा रहा है। कक्षा एक से कक्षा नौ तक के बच्चों को हिंदी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान में निपुण किया जा रहा है।
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ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
जीआईसी कोरूवा में तैनात सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षक दो माह से अनुपस्थित चल रहे हैं। इसके चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों में रोष है। उन्होंने शुक्रवार को मिशन कोशिश के तहत आयोजित होने वाली सामाजिक विज्ञान विषय की परीक्षा को न होने देने की चेतावनी दी है।
जीआईसी कोरूवा स्कूल में 120 छात्र अध्ययनरत हैं। अभिभावकों का आरोप है कि पूर्व में शिक्षक को जिला शिक्षाधिकारी के यहां अटैच किया गया था, लेकिन अभिभावकों के हंगामे के बाद उन्हें दुबारा से स्कूल में भेज दिया गया। बीते दो माह से शिक्षक स्कूल नहीं आ रहे हैं। शिक्षक की यह मनमर्जी छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। उन्हें मॉडल और गाइडों के सहारे भविष्य संवारना पड़ रहा है। मुख्य शिक्षाधिकारी से शिकायत के बावजूद शिक्षक की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आ रहा है। पीटीए अध्यक्ष दयापाल सिंह, एसएमसी अध्यक्ष अर्जुन सिंह तोमर, वीरेंद्र सिंह तोमर, संतन सिंह, विक्रम सिंह तोमर आदि का कहना है कि विभागीय उदासीनता के चलते ही अभिभावकों ने परीक्षा न होने देने का निर्णय लिया है। जरूरत पड़ी तो अभिभावकों को स्कूल में तालाबंदी को भी बाध्य होना पड़ेगा।
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मुख्य शिक्षाधिकारी एसपी जोशी ने बताया कि यदि शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे हैं तो उनका वेतन रोका जाएगा। सोमवार तक स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिक्षक की तैनाती कर दी जाएगी।
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क्या है मिशन कोशिश
सरकारी स्कूलों के छात्रों की दक्षता को निखारने के लिए शिक्षा विभाग ने मिशन कोशिश शुरू किया है। एक अप्रैल शुरू होकर 30 मई तक चलने वाले मिशन कोशिश कार्यक्रम में छात्रों को कई अहम जानकारियां देकर उनके ज्ञान को निखारा जा रहा है। कक्षा एक से कक्षा नौ तक के बच्चों को हिंदी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान में निपुण किया जा रहा है।