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ग्वालदम में 15 सालों में 15 जलस्रोत सूखे
Updated Wed, 25 Apr 2018 11:00 PM IST
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थराली। पर्यटन नगरी ग्वालदम सहित आस-पास के क्षेत्रों में 15 सालों में 80 प्रतिशत पेयजल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे ग्वालदम और उससे लगे गांवों में पेयजल किल्लत बनी हुई है। लोगों का कहना है कि करीब डेढ़ दशक पूर्व ग्वालदम में 18 से अधिक प्राकृतिक धारे थे और ग्वालदम में दो-तीन बड़ी झीलें थीं, लेकिन वर्तमान में केवल 3 प्राकृतिक धारे बचे हैं। कस्बे में टैंकरों से आपूर्ति हो रही है लेकिन यह पानी भी पर्याप्त नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण नहीं किया तो जानवरों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे खिलाप सिंह शाह बताते हैं कि आज से 15 साल पहले कोई पेयजल लाइन नहीं थी, लेकिन कस्बे में हर 100-200 सौ मीटर दूरी पर प्राकृतिक जल स्रोत थे। ग्वालदम के सांगीरोल में दो, टूयां में तीन, ग्वालदम नाग में 5, ग्वालदम गांव में 3, जोशी बस्ती में दो और सब्जी तोक में दो तथा मंगरकुड़ा में दो प्राकृतिक धारे थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि केवल सब्जी तोक में एक, टूंया में एक और मगरकुड़ा में एक जलस्रोत बचा है। बाकी 15 जलस्रोत सूख चुके हैं। नंदकेशरी से ग्वालदम जाने वाले लार्ज कर्जन ट्रैक पर हर 200 मीटर पर जल स्रोत थे, लेकिन इस रूट पर कोई जलस्रोत नहीं बचा है। एसएसबी, बीआरओ और जलसंस्थान यहां टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है। पर्यावरणविद कल्याण सिंह रावत ने बताया कि ग्वालदम व आस-पास के क्षेत्रों में बांज के जंगल कटे हैं। बढ़ते निर्माण कार्य और विकास के नाम पर हरे पेड़ों के काटने से ये स्थिति हुई है। वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या, पर्यटन नगरी और एसएसबी की आवश्यकता को देखते हुए अब ग्वालदम के लिए 14 करोड़ की पंपिंग योजना का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पिंडर नदी का पानी चिड़िंगा से ग्वालदम पहुंचाया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे खिलाप सिंह शाह बताते हैं कि आज से 15 साल पहले कोई पेयजल लाइन नहीं थी, लेकिन कस्बे में हर 100-200 सौ मीटर दूरी पर प्राकृतिक जल स्रोत थे। ग्वालदम के सांगीरोल में दो, टूयां में तीन, ग्वालदम नाग में 5, ग्वालदम गांव में 3, जोशी बस्ती में दो और सब्जी तोक में दो तथा मंगरकुड़ा में दो प्राकृतिक धारे थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि केवल सब्जी तोक में एक, टूंया में एक और मगरकुड़ा में एक जलस्रोत बचा है। बाकी 15 जलस्रोत सूख चुके हैं। नंदकेशरी से ग्वालदम जाने वाले लार्ज कर्जन ट्रैक पर हर 200 मीटर पर जल स्रोत थे, लेकिन इस रूट पर कोई जलस्रोत नहीं बचा है। एसएसबी, बीआरओ और जलसंस्थान यहां टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है। पर्यावरणविद कल्याण सिंह रावत ने बताया कि ग्वालदम व आस-पास के क्षेत्रों में बांज के जंगल कटे हैं। बढ़ते निर्माण कार्य और विकास के नाम पर हरे पेड़ों के काटने से ये स्थिति हुई है। वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या, पर्यटन नगरी और एसएसबी की आवश्यकता को देखते हुए अब ग्वालदम के लिए 14 करोड़ की पंपिंग योजना का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पिंडर नदी का पानी चिड़िंगा से ग्वालदम पहुंचाया जाएगा।
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