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आंदोलनकारी संगठनों में दो फाड़
Updated Wed, 25 Apr 2018 10:44 PM IST
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गैरसैंण। स्थायी राजधानी गैरसैंण को घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन में दो फाड़ हो गए हैं। कुछ आंदोलनकारी राजधानी की मांग को लेकर रामलीला मैदान में डटे हैं तो कुछ ने रामलीला मैदान के कक्ष में यह कहकर ताला लगा दिया कि आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है। ऐसे में 143 दिनों से चल रहे इस राजधानी आंदोलन में बिखराव की स्थिति बन गई है। हालांकि संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि राजधानी की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष पूरण सिंह नेगी, कृष्णा नेगी, सरोज शाह और सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कुछ आंदोलन के बहाने निकाय चुनावों की तैयारी कर रहे हैं, जिसके चलते आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। रामलीला समिति को कक्ष पर ताला लगाने के लिए सूचित किया गया। वहीं दूसरी ओर संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि आंदोलन स्थगित नहीं होगा। गैरसैंण राजधानी का मुद्दा निकाय चुनावों का नहीं है। बुधवार को कक्ष के बाहर मैदान में धरना जारी रहा। इधर गैरसैंण राजधानी समन्वय समिति के केंद्रीय अध्यक्ष चारु तिवारी ने कहा कि गैरसैंण संघर्ष समिति आंदोलन पर निर्णय ले सकती है, लेकिन धड़ों में बंट कर नहीं बल्कि एक साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। 27 अप्रैल को गोपेश्वर में समन्वयक समिति की बैठक है। धरना देने वालों में नारायण सिंह विष्ट, लक्ष्मण पवार, वैशाली देवी, काशी देवी, महेशी, कमला पंवार, नंदन नेगी, पुष्पा, सुनीता और पार्वती आदि शामिल थे।
संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष पूरण सिंह नेगी, कृष्णा नेगी, सरोज शाह और सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कुछ आंदोलन के बहाने निकाय चुनावों की तैयारी कर रहे हैं, जिसके चलते आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। रामलीला समिति को कक्ष पर ताला लगाने के लिए सूचित किया गया। वहीं दूसरी ओर संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि आंदोलन स्थगित नहीं होगा। गैरसैंण राजधानी का मुद्दा निकाय चुनावों का नहीं है। बुधवार को कक्ष के बाहर मैदान में धरना जारी रहा। इधर गैरसैंण राजधानी समन्वय समिति के केंद्रीय अध्यक्ष चारु तिवारी ने कहा कि गैरसैंण संघर्ष समिति आंदोलन पर निर्णय ले सकती है, लेकिन धड़ों में बंट कर नहीं बल्कि एक साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। 27 अप्रैल को गोपेश्वर में समन्वयक समिति की बैठक है। धरना देने वालों में नारायण सिंह विष्ट, लक्ष्मण पवार, वैशाली देवी, काशी देवी, महेशी, कमला पंवार, नंदन नेगी, पुष्पा, सुनीता और पार्वती आदि शामिल थे।
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