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कन्या भ्रूण हत्या के पाप से मुक्ति नहीं
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
बेटी को हर रूप में पूजा जाना चाहिए, जिस घर में बेटी का सम्मान होता है, वहां साक्षात लक्ष्मी का वास होता है। कन्या भ्रूण हत्या करने वाले लोग पाप के भागी हैं। यह बातें कथावाचक डॉ. दुर्गेशाचार्य महाराज ने बुधवार को त्रिवेणीघाट पर श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कहीं।
विश्व शांति सद्भावना समिति के तत्वावधान में त्रिवेणीघाट पर आयोजित कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन भागवताचार्य डॉ. दुर्गेशाचार्य ने बुधवार के भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रास लीला का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान सभी जीवों में मौजूद हैं। उन्हें मन से स्मरण करने की आवश्यकता होती है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। कथावाचक ने कहा कि हर बेटी की देवी के रूप मेें पूजा होनी चाहिए। बेटियों को मारने वाले लोग पाप के भागी हैं। कन्या भ्रूण हत्या के पाप से मुक्ति नहीं है। धार्मिक अनुष्ठान में राम सिंह नेगी, स्वरूप सिंह खरोला, भरतमणि कुड़ियाल, राजपाल रावत, गोविंद खरोला, जगत सिंह रावत, बाबूलाल अग्रवाल, सुलोचना खरोला, बीना रावत, बैशाखी रावत, बीना बहुगुणा, सरला नेगी, रमेश चमोली, कुशलानंद, गोदांबरी देवी, सुनीता खरोला, गोविंद बिष्ट, विमल पैन्यूली, आजाद पैन्यूली, घनश्याम भट्ट, पूर्णकला चंदोला, सीपी ध्यानी, बिरोजनी भट्ट आदि मौजूद रहे।
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बेटी को हर रूप में पूजा जाना चाहिए, जिस घर में बेटी का सम्मान होता है, वहां साक्षात लक्ष्मी का वास होता है। कन्या भ्रूण हत्या करने वाले लोग पाप के भागी हैं। यह बातें कथावाचक डॉ. दुर्गेशाचार्य महाराज ने बुधवार को त्रिवेणीघाट पर श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कहीं।
विश्व शांति सद्भावना समिति के तत्वावधान में त्रिवेणीघाट पर आयोजित कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन भागवताचार्य डॉ. दुर्गेशाचार्य ने बुधवार के भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रास लीला का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान सभी जीवों में मौजूद हैं। उन्हें मन से स्मरण करने की आवश्यकता होती है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। कथावाचक ने कहा कि हर बेटी की देवी के रूप मेें पूजा होनी चाहिए। बेटियों को मारने वाले लोग पाप के भागी हैं। कन्या भ्रूण हत्या के पाप से मुक्ति नहीं है। धार्मिक अनुष्ठान में राम सिंह नेगी, स्वरूप सिंह खरोला, भरतमणि कुड़ियाल, राजपाल रावत, गोविंद खरोला, जगत सिंह रावत, बाबूलाल अग्रवाल, सुलोचना खरोला, बीना रावत, बैशाखी रावत, बीना बहुगुणा, सरला नेगी, रमेश चमोली, कुशलानंद, गोदांबरी देवी, सुनीता खरोला, गोविंद बिष्ट, विमल पैन्यूली, आजाद पैन्यूली, घनश्याम भट्ट, पूर्णकला चंदोला, सीपी ध्यानी, बिरोजनी भट्ट आदि मौजूद रहे।
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