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पानी की तलाश में भटके जंगल से आए कौवे
Updated Thu, 22 Mar 2018 10:11 PM IST
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श्रीनगर। पानी की तलाश में घूमते घूमते जब दो कौए शहर पहुंचे तो उन्हें पानी तो मिलता है, लेकिन बोतल में बंद। शहर की यह स्थिति देख वह कहते है कि एक समय वो था जब घड़ा और कंकड़ थे, लेकिन आज समय बदल गया है। अब कंकड़ बिल्डर ले गए और पानी बोतलों में चला गया।
केंद्रीय गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र की पहल पर बाल उलार नाट्य महोत्सव का आयोजन किया गया। बुधवार शाम से शुरू हुए महोत्सव के पहले दिन विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने ‘थ्रस्टी क्रो रिटर्नस’ नाटक का मंचन किया गया। शहर में कंक्रीट के जंगल और बोतल में बंद पानी देख कौवे चकरा गए और यह दृश्य देख हाल तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह कहानी स्कूली किताबों में पढ़ाई जानी वाली प्यासा कौवा से आगे का दृश्य दिखाती है। नाटक में दिखाया गया कि दो कौवे जंगल से शहर में पहुंचते हैं, और शहर की बदहाल स्थिति देखते है। किसी जंगल में गंदी आवाज में गाने वाले दो कौवे रहते हैं। उनकी इस आदत से जंगल के पशु-पक्षी परेशान रहते हैं। वह जंगल के राजा शेर से उनकी शिकायत करते हैं। शेर फैसला करता है कि दोनों गाना छोड़ दे, अन्यथा जंगल छोड़कर चले जाए। दोनों यह कहकर जंगल छोड़ देते हैं कि वह गाना सीखकर आएंगे। वह जॉनी बंदर से गाना सीखते हैं और जंगल वापस लौट जाते हैं। कर्कश आवाज के कारण उनको फिर जंगल से भगा दिया जाता है। शेर घोषणा करता है कि जो उनको पानी पिलाएगा, उसको मृत्युदंड दिया जाएगा। पानी की तलाश में शहर में पहुंचे कौए देखते हैं कि शहर बदल चुके हैं। शहर में कंक्रीट के जंगल उग गए हैं। बोतलबंद पानी मिल रहा है। उनको पानी नदी-नालों के बजाय बोतल में दिखता है, जिसके लिए रुपये देने पड़ते हैं। इसे देख कौवे कहते हैं कि एक समय वो था जब घड़ा और कंकड़ थे, लेकिन आज समय बदल गया है, अब कंकड़ बिल्डर ले गए और पानी अब बोतलों में चला गया।
नाटक के पात्र
अंकित भट्ट, अमन खत्री, प्रीति दानू, गौरांशी, आकाशि काला, कशिश, सोनियाल, विवेक, मिली महाजन, श्रेरीमा, मारिशा ताशा, अनुज कोटियाल, श्रेष्ठ, ऋतिक और अभिनव नौटियाल
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केंद्रीय गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र की पहल पर बाल उलार नाट्य महोत्सव का आयोजन किया गया। बुधवार शाम से शुरू हुए महोत्सव के पहले दिन विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने ‘थ्रस्टी क्रो रिटर्नस’ नाटक का मंचन किया गया। शहर में कंक्रीट के जंगल और बोतल में बंद पानी देख कौवे चकरा गए और यह दृश्य देख हाल तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह कहानी स्कूली किताबों में पढ़ाई जानी वाली प्यासा कौवा से आगे का दृश्य दिखाती है। नाटक में दिखाया गया कि दो कौवे जंगल से शहर में पहुंचते हैं, और शहर की बदहाल स्थिति देखते है। किसी जंगल में गंदी आवाज में गाने वाले दो कौवे रहते हैं। उनकी इस आदत से जंगल के पशु-पक्षी परेशान रहते हैं। वह जंगल के राजा शेर से उनकी शिकायत करते हैं। शेर फैसला करता है कि दोनों गाना छोड़ दे, अन्यथा जंगल छोड़कर चले जाए। दोनों यह कहकर जंगल छोड़ देते हैं कि वह गाना सीखकर आएंगे। वह जॉनी बंदर से गाना सीखते हैं और जंगल वापस लौट जाते हैं। कर्कश आवाज के कारण उनको फिर जंगल से भगा दिया जाता है। शेर घोषणा करता है कि जो उनको पानी पिलाएगा, उसको मृत्युदंड दिया जाएगा। पानी की तलाश में शहर में पहुंचे कौए देखते हैं कि शहर बदल चुके हैं। शहर में कंक्रीट के जंगल उग गए हैं। बोतलबंद पानी मिल रहा है। उनको पानी नदी-नालों के बजाय बोतल में दिखता है, जिसके लिए रुपये देने पड़ते हैं। इसे देख कौवे कहते हैं कि एक समय वो था जब घड़ा और कंकड़ थे, लेकिन आज समय बदल गया है, अब कंकड़ बिल्डर ले गए और पानी अब बोतलों में चला गया।
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नाटक के पात्र
अंकित भट्ट, अमन खत्री, प्रीति दानू, गौरांशी, आकाशि काला, कशिश, सोनियाल, विवेक, मिली महाजन, श्रेरीमा, मारिशा ताशा, अनुज कोटियाल, श्रेष्ठ, ऋतिक और अभिनव नौटियाल
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