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बाजारीकरण कर बेचा जा रहा है योग
Updated Mon, 05 Mar 2018 01:44 AM IST
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ब्यूरो/ऋषिकेश। पद्मश्री से सम्मानित योग गुरु भारत भूषण की बेटी आचार्य प्रतिष्ठा विदेशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग की तालीम दे रही हैं। वर्ष 2007 में आचार्य प्रतिष्ठा को वर्ल्ड योगा ऑर्गेनाइजेशन की ओर से यंगेस्ट योगाचार्य के अवार्ड से नवाजा जा चुका है। वह सभी योग मुद्राओं, आध्यात्म के गठबंधन को योग मानती हैं।
अमेरिका, दुबई, साउथ अफ्रीका, जापान आदि देशों में आचार्य प्रतिष्ठा भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग की शिक्षा दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में योग का बाजारीकरण होने से योग को कई भागों में बांटकर अलग-अलग नाम से बेचा जा रहा है। जबकि सभी योग क्रियाओं और आध्यात्म की कड़ी को मिलाकर ही योग बनता है। भारत सरकार के सहयोग से प्रतिष्ठा दुनिया के 55 से अधिक देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग के प्रचार को कार्यक्रम कर चुकी हैं।
प्रतिष्ठा का मानना है कि सूर्य नमस्कार को कुछ लोग अपने हित साधन के लिए धर्म से जोड़ते रहे हैं। बकौल प्रतिष्ठा वह कई गैर हिंदू देशों में साधकों को सूर्य नमस्कार और ओम के उच्चारण का अभ्यास करा चुकी हैं, जिससे साधकों को लाभ हुआ है। आचार्य प्रतिष्ठा ने प्रतिस्पर्धा के दौर में नामुमकिन को मुमकिन में तब्दील करने के लिए नियमित योग और ध्यान की सलाह दी।
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अमेरिका, दुबई, साउथ अफ्रीका, जापान आदि देशों में आचार्य प्रतिष्ठा भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग की शिक्षा दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में योग का बाजारीकरण होने से योग को कई भागों में बांटकर अलग-अलग नाम से बेचा जा रहा है। जबकि सभी योग क्रियाओं और आध्यात्म की कड़ी को मिलाकर ही योग बनता है। भारत सरकार के सहयोग से प्रतिष्ठा दुनिया के 55 से अधिक देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग के प्रचार को कार्यक्रम कर चुकी हैं।
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प्रतिष्ठा का मानना है कि सूर्य नमस्कार को कुछ लोग अपने हित साधन के लिए धर्म से जोड़ते रहे हैं। बकौल प्रतिष्ठा वह कई गैर हिंदू देशों में साधकों को सूर्य नमस्कार और ओम के उच्चारण का अभ्यास करा चुकी हैं, जिससे साधकों को लाभ हुआ है। आचार्य प्रतिष्ठा ने प्रतिस्पर्धा के दौर में नामुमकिन को मुमकिन में तब्दील करने के लिए नियमित योग और ध्यान की सलाह दी।
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