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अनशन पर बैठे
Updated Sat, 03 Mar 2018 10:04 PM IST
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गैरसैंण। स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में क्रमिक अनशन 37वें दिन शनिवार को भी जारी रहा। 37वें दिन गैड़ गांव के बुजुर्ग शालिग राम मनूड़ी (81) भी आमरण अनशन पर बैठे। समिति के लोगों ने शालिग राम का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान आमरण अनशन करने वालों में शालिग राम भी शामिल रहे हैं। वहीं 25 फरवरी से अनशन पर बैठी राज्य आंदोलनकारी धूमा देवी और महेश पांडे के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में 12 दिसंबर 2017 से क्रमिक और 26 जनवरी 2018 से आमरण अनशन चल रहा है। आमरण अनशन पर बैठने वाले आंदोलनकारियों को कई बार प्रशासन की ओर से फोर्स फीडिंग कराई गई, लेकिन लगातार अनशन पर बैठने आ रहे नए आंदोलनकारी प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बने हैं। वहीं मामला सरकार स्तर का होने के चलते भी प्रशासन के सामने आंदोलन से निपटना चुनौती बना है। शनिवार को 81 वर्षीय बुजुर्ग शालिग राम के क्रमिक अनशन पर बैठने से प्रशासन के लिए और मुुश्किल खड़ी कर दी है। वहीं 25 फरवरी से अनशन पर बैठी बुजुर्ग अनशनकारी धूमा देवी और महेश पांडे के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल भर्ती होने की सलाह दी। डा. विकास का कहना है कि आंदोलनकारियों के वजन में गिरावट के साथ ही डिहाइड्रेशन सहित कई कमियां मिली हैं। वहीं आंदोलन के समर्थन में आंदोलनकारियों ने रामलीला मैदान में नारेबाजी की। साथ ही सरकार पर गैरसैंण की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इस दौरान स्थायी राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह विष्ट, महामंत्री धनीराम, व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह विष्ट, लक्ष्मण सिंह पंवार, पुष्कर सिंह रावत , मोहनराम टम्टा, कमला पंवार, सरोज शाह, जसवंत विष्ट, देवेंद्र विष्ट, वीरेंद्र प्रसाद जोशी, बलवंत सिंह, मंजू, महेशी, लक्ष्मण खत्री, नंदन नेगी, जशोदा, प्रभास कुमार, सुरेंद्र सिंह रावत आदि कई आंदोलनकारी मौजूद थे।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में 12 दिसंबर 2017 से क्रमिक और 26 जनवरी 2018 से आमरण अनशन चल रहा है। आमरण अनशन पर बैठने वाले आंदोलनकारियों को कई बार प्रशासन की ओर से फोर्स फीडिंग कराई गई, लेकिन लगातार अनशन पर बैठने आ रहे नए आंदोलनकारी प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बने हैं। वहीं मामला सरकार स्तर का होने के चलते भी प्रशासन के सामने आंदोलन से निपटना चुनौती बना है। शनिवार को 81 वर्षीय बुजुर्ग शालिग राम के क्रमिक अनशन पर बैठने से प्रशासन के लिए और मुुश्किल खड़ी कर दी है। वहीं 25 फरवरी से अनशन पर बैठी बुजुर्ग अनशनकारी धूमा देवी और महेश पांडे के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल भर्ती होने की सलाह दी। डा. विकास का कहना है कि आंदोलनकारियों के वजन में गिरावट के साथ ही डिहाइड्रेशन सहित कई कमियां मिली हैं। वहीं आंदोलन के समर्थन में आंदोलनकारियों ने रामलीला मैदान में नारेबाजी की। साथ ही सरकार पर गैरसैंण की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इस दौरान स्थायी राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह विष्ट, महामंत्री धनीराम, व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह विष्ट, लक्ष्मण सिंह पंवार, पुष्कर सिंह रावत , मोहनराम टम्टा, कमला पंवार, सरोज शाह, जसवंत विष्ट, देवेंद्र विष्ट, वीरेंद्र प्रसाद जोशी, बलवंत सिंह, मंजू, महेशी, लक्ष्मण खत्री, नंदन नेगी, जशोदा, प्रभास कुमार, सुरेंद्र सिंह रावत आदि कई आंदोलनकारी मौजूद थे।
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