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गर्मियों में इस बार फिर झेलना पड़ेगा पानी संकट
Updated Thu, 15 Feb 2018 02:24 AM IST
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गर्मियों में इस बार फिर झेलना पड़ेगा पानी संकट
अमर उजाला ब्यूरो
साहिया।
जौनसार बावर में कई पेयजल लाइनों के जर्जर होने के कारण गर्मियों में लोगों को पेयजल संकट झेलना पड़ेगा क्योंकि गर्मियों में अक्सर जलस्रोतों में पानी का जल स्तर घट जाता है। बीतें साल भी क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों से जुड़े गांव में पानी का भीषण जल संकट खड़ा हो गया था। तब विभाग के अधिकारियों ने टैंकरों और खच्चरों से पेयजल आपूर्ति करनी पड़ी थी। लेकिन पिछली गलतियों से भी विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत नहीं कराई गई।
ग्रामीण कल्याण सिंह, प्रदीप, हरदयाल सिंह, हरीश आदि का कहना हैं कि क्षेत्र के ज्यादातर गांव में 70 के दशक में पेयजल लाइनें बिछाई गई। जिसके बाद विभाग ने इन लाइनों की सुध लेना जरूरी नहीं समझा। साल 2012 और 2013 में आपदा के दौरान भी पेयजल लाइनों को खासा नुकसान पहुंचा। तब ग्रामीणों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्लास्टिक के पाइपों के सहारे पेयजल व्यवस्था को सुचारू रखा, लेकिन अब वह वैकल्पिक व्यवस्था भी पूरी तरह से जवाब दे चुकी है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जीपी गैरोला ने बताया कि क्षतिग्रस्त लाइनों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही पेयजल लाइनों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
ये पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त
क्षेत्र के चातरीगाड़, हनोल, कूणा, मुंधोल, रड़ू, उत्पाल्टा, उपरोली, अलसी, सकनी, साहिया बाजार, गोथान, बोहरी, सुरेऊ, ऊभरेऊ, भंजरा, खमरोली, जामुवा, माख्टी, पोखरी, मलेथा, दातनू समेत 36 से अधिक पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त पड़ी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
साहिया।
जौनसार बावर में कई पेयजल लाइनों के जर्जर होने के कारण गर्मियों में लोगों को पेयजल संकट झेलना पड़ेगा क्योंकि गर्मियों में अक्सर जलस्रोतों में पानी का जल स्तर घट जाता है। बीतें साल भी क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों से जुड़े गांव में पानी का भीषण जल संकट खड़ा हो गया था। तब विभाग के अधिकारियों ने टैंकरों और खच्चरों से पेयजल आपूर्ति करनी पड़ी थी। लेकिन पिछली गलतियों से भी विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत नहीं कराई गई।
ग्रामीण कल्याण सिंह, प्रदीप, हरदयाल सिंह, हरीश आदि का कहना हैं कि क्षेत्र के ज्यादातर गांव में 70 के दशक में पेयजल लाइनें बिछाई गई। जिसके बाद विभाग ने इन लाइनों की सुध लेना जरूरी नहीं समझा। साल 2012 और 2013 में आपदा के दौरान भी पेयजल लाइनों को खासा नुकसान पहुंचा। तब ग्रामीणों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्लास्टिक के पाइपों के सहारे पेयजल व्यवस्था को सुचारू रखा, लेकिन अब वह वैकल्पिक व्यवस्था भी पूरी तरह से जवाब दे चुकी है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जीपी गैरोला ने बताया कि क्षतिग्रस्त लाइनों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही पेयजल लाइनों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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ये पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त
क्षेत्र के चातरीगाड़, हनोल, कूणा, मुंधोल, रड़ू, उत्पाल्टा, उपरोली, अलसी, सकनी, साहिया बाजार, गोथान, बोहरी, सुरेऊ, ऊभरेऊ, भंजरा, खमरोली, जामुवा, माख्टी, पोखरी, मलेथा, दातनू समेत 36 से अधिक पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त पड़ी है।
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