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पुरातत्व विभाग के नियम गोपेश्वर के भवन स्वामियों के लिये बने आफत का सबब

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Sun, 14 Jan 2018 10:49 PM IST
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गोपेश्वर। भारतीय पुरातत्व विभाग की प्रतीक संरक्षण नियमावली नगर के लोगों के लिए आफत का सबब बन गई है। पुरातत्व विभाग ने गोपीनाथ मंदिर के तीन सौ मीटर की दूरी में निर्माण कार्य पर रोक की बात कहते हुए अपने भवनों का सुधारीकरण करा रहे करीब 50 भवन स्वामियों को नोटिस थमा दिए हैं। ऐसे में अब नवनिर्माण तो दूर लोग अपने पूर्व में बने भवनों को भी ठीक नहीं करा पा रहे हैं।
गढ़वाल क्षेत्र के पौराणिक मंदिरों में शामिल गोपीनाथ मंदिर के संरक्षण के लिए वर्ष 2005 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे अधिग्रहीत किया। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा और सुधारीकरण कार्य में तेजी आई लेकिन पुरातत्व विभाग के नियमों के चलते लोगों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। विभागीय नियम के अनुसार गोपीनाथ मंदिर के आस-पास तीन सौ मीटर की दूरी तक कोई भी निर्माण या सुधारीकरण के लिए विभाग के केंद्रीय कार्यालय से अनुमति लेनी जरूरी है, लेकिन विभाग का केंद्रीय कार्यालय दिल्ली में होने से अनुमति लेने में लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ लोगों ने यहां बिना अनुमति के अपने मकानों का सुधारीकरण कार्य शुरू करवाया तो पुरातत्व विभाग ने 50 लोगों को काम रोकने के नोटिस थमा दिए। लोगों ने विभागीय अधिकारियों से नगर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार नियमों में छूट देने की मांग की, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने नियमों की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया।


क्या कहते हैं ग्रामीण
- नवल भट्ट का कहना है कि गोपीनाथ मंदिर के समीप अधिकतर भवन मंदिर अधिग्रहण से कई दशक पूर्व के बने हुए हैं, जिनकी स्थिति अब जर्जर हो गई है। जब भवन स्वामियों की ओर से भवनों का सुधारीकरण कार्य किया जा रहा है तो विभागीय कर्मचारियों की ओर से नोटिस थमाया जा रहा है।

- ओम प्रकाश नेगी का कहना है कि इन दिनों वर्ष 1970 में निर्मित भवन का सुधारीकरण कार्य किया जा रहा है, लेकिन पुरातत्व विभाग की ओर से नोटिस देकर सुधारीकरण कार्य पर रोक लगा दी गई है। इससे भवन का सुधारीकरण कार्य अधूरा ही रह गया है।

कोट
गोपेश्वर नगर की भौगोलिक स्थिति को पुरातत्व विभाग के उच्चाधिकारियों के सामने रखा जाएगा। साथ ही भवन निर्माण और सुधारीकरण की अनुमति की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए शीघ्र पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। - ईला गिरी, प्रभारी जिलाधिकारी, चमोली।

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