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आरटीओ में नहीं है ऑनलाइन भुगतान की व्यवस् था
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाने के केंद्र सरकार के निर्देशों के विपरीत राज्य सरकार के एक अहम परिवहन विभाग के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में आज भी सारे कार्य नकद भुगतान पर ही हो रहे हैं। गौरतलब है कि यहां प्रतिदिन वाहनों के पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस शुल्क, जुर्माने जैसे मदों में कई लाख रुपए नकद जमा होते हैं। छोटे-मोटे मामलों में तो कोई बात नहीं, मगर नए वाहनों के पंजीकरण कराने वाले के लिए यह व्यवस्था बड़ी तकलीफदेह है।
अव्वल तो रजिस्ट्रेशन के लिए यहां आने वाले वाहनस्वामियों को कल्पना तक नहीं होती कि आरटीओ जैसे अहम सरकारी कार्यालय में स्वाइप मशीन या ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं होगी। वहां पहुंचकर जब उसे जानकारी होती है तो उसे नकद पैसे इकट्ठे करने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। मोटे तौर पर सेविंग एकाउंट के किसी डेबिट कार्ड से से पैसे निकालने की तयसीमा के चलते एकबार में 20 हजार रुपए से ज्यादा निकालना मुमकिन नहीं है। अमूमन एक कार के रजिस्ट्रेशन पर न्यूनतम 30 हजार रुपए तो जमा करने ही पड़ते हैं। वहीं महंगी कारों, बसों, ट्रकों के रजिस्ट्रेशन शुल्क उसी अनुपात में काफी ज्यादा है। सोमवार को अमर उजाला रिपोर्टर ने आरटीओ कार्यालय पहुंचे तमाम लोगों के इस समस्या से जूझते देखा। डोईवाला से वाहन का रजिस्ट्रेशन करवाने पहुंचे राकेश कुमार ने बताया कि वह एटीएम कार्ड लेकर पहुंचे थे। लेकिन, यहां आकर पता चला कि उन्हें नगद राशि ही जमा करनी होगी। जिसकी वजह से वह अब बिना रजिस्ट्रेशन कराए लौटने को मजबूर हो रहे हैं। अब वह बुधवार को रजिस्ट्रेशन कराने आएंगे। ऐसा ही क्लेमेंटटाउन से कार का रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे सर्वेश कुमार के साथ हुआ। उन्होंने अधिकारियों से स्वाइप मशीन के जरिये भुगतान की व्यवस्था करने की मांग की। जीएमएस रोड निवासी राजेश बिष्ट ने बताया कि पहले ही चारपहिया वाहन के रजिस्ट्रेशन के लिए वह तीन घंटे से इधर-उधर भटक रहे हैं। अब बताया जा रहा है कि पहले नगद फीस जमा करानी होगी, इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन होगा। अगर पहले बता देते तो घर से पैसे लेकर आता, अब एक-दो दिन बाद ही रजिस्ट्रेशन कराने आऊंगा। प्रेमनगर निवासी अमित बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जहां ऑनलाइन व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं, वहीं यहां अभी भी पुरानी परंपरा है। घंटाघर के पास मौजूद एटीएम से पैसे निकालकर रजिस्ट्रेशन कराया है। पूरा दिन बर्बाद हो गया।
अधिकारी भी कर देते हैं अनसुना
आरटीओ में रोजाना एक दर्जन से अधिक लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान की व्यवस्था न होने के चलते मायूस होकर लौटते हैं। इनमें से कई आरटीओ और एआरटीओ के पास जाकर शिकायत दर्ज कराते हैं। लेकिन, अधिकारी उसे अनसुना कर देते हैं। अगर वह इसे गंभीरता से लेते तो व्यवस्था कब की सुधर गई होती।
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आरटीओ में रजिस्ट्रेशन समेत अन्य फीस नगद ली जाती है। कैशलेस व्यवस्था के लिए बैंक, एनआईसी और वित्त विभाग के साथ बैठक की गई है। जिसमसें बैंकों से प्रस्ताव मांगें गए हैं। जल्द ही आरटीओ में स्वाइप मशीन के जरिये भुगतान किया जा सकेगा। - शैलेश बगौली, परिवहन सचिव
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देहरादून। डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाने के केंद्र सरकार के निर्देशों के विपरीत राज्य सरकार के एक अहम परिवहन विभाग के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में आज भी सारे कार्य नकद भुगतान पर ही हो रहे हैं। गौरतलब है कि यहां प्रतिदिन वाहनों के पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस शुल्क, जुर्माने जैसे मदों में कई लाख रुपए नकद जमा होते हैं। छोटे-मोटे मामलों में तो कोई बात नहीं, मगर नए वाहनों के पंजीकरण कराने वाले के लिए यह व्यवस्था बड़ी तकलीफदेह है।
अव्वल तो रजिस्ट्रेशन के लिए यहां आने वाले वाहनस्वामियों को कल्पना तक नहीं होती कि आरटीओ जैसे अहम सरकारी कार्यालय में स्वाइप मशीन या ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं होगी। वहां पहुंचकर जब उसे जानकारी होती है तो उसे नकद पैसे इकट्ठे करने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। मोटे तौर पर सेविंग एकाउंट के किसी डेबिट कार्ड से से पैसे निकालने की तयसीमा के चलते एकबार में 20 हजार रुपए से ज्यादा निकालना मुमकिन नहीं है। अमूमन एक कार के रजिस्ट्रेशन पर न्यूनतम 30 हजार रुपए तो जमा करने ही पड़ते हैं। वहीं महंगी कारों, बसों, ट्रकों के रजिस्ट्रेशन शुल्क उसी अनुपात में काफी ज्यादा है। सोमवार को अमर उजाला रिपोर्टर ने आरटीओ कार्यालय पहुंचे तमाम लोगों के इस समस्या से जूझते देखा। डोईवाला से वाहन का रजिस्ट्रेशन करवाने पहुंचे राकेश कुमार ने बताया कि वह एटीएम कार्ड लेकर पहुंचे थे। लेकिन, यहां आकर पता चला कि उन्हें नगद राशि ही जमा करनी होगी। जिसकी वजह से वह अब बिना रजिस्ट्रेशन कराए लौटने को मजबूर हो रहे हैं। अब वह बुधवार को रजिस्ट्रेशन कराने आएंगे। ऐसा ही क्लेमेंटटाउन से कार का रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे सर्वेश कुमार के साथ हुआ। उन्होंने अधिकारियों से स्वाइप मशीन के जरिये भुगतान की व्यवस्था करने की मांग की। जीएमएस रोड निवासी राजेश बिष्ट ने बताया कि पहले ही चारपहिया वाहन के रजिस्ट्रेशन के लिए वह तीन घंटे से इधर-उधर भटक रहे हैं। अब बताया जा रहा है कि पहले नगद फीस जमा करानी होगी, इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन होगा। अगर पहले बता देते तो घर से पैसे लेकर आता, अब एक-दो दिन बाद ही रजिस्ट्रेशन कराने आऊंगा। प्रेमनगर निवासी अमित बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जहां ऑनलाइन व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं, वहीं यहां अभी भी पुरानी परंपरा है। घंटाघर के पास मौजूद एटीएम से पैसे निकालकर रजिस्ट्रेशन कराया है। पूरा दिन बर्बाद हो गया।
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अधिकारी भी कर देते हैं अनसुना
आरटीओ में रोजाना एक दर्जन से अधिक लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान की व्यवस्था न होने के चलते मायूस होकर लौटते हैं। इनमें से कई आरटीओ और एआरटीओ के पास जाकर शिकायत दर्ज कराते हैं। लेकिन, अधिकारी उसे अनसुना कर देते हैं। अगर वह इसे गंभीरता से लेते तो व्यवस्था कब की सुधर गई होती।
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आरटीओ में रजिस्ट्रेशन समेत अन्य फीस नगद ली जाती है। कैशलेस व्यवस्था के लिए बैंक, एनआईसी और वित्त विभाग के साथ बैठक की गई है। जिसमसें बैंकों से प्रस्ताव मांगें गए हैं। जल्द ही आरटीओ में स्वाइप मशीन के जरिये भुगतान किया जा सकेगा। - शैलेश बगौली, परिवहन सचिव