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सनातन धर्म का नष्ट करने पर तुले कुछ लोग: शंकराचार्य
Updated Mon, 08 Jan 2018 10:41 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि सनातन धर्म इस समय खतरे में है। कुछ लोग ज्योर्तिपीठ का विवाद खड़ा कर पड़यंत्र रच रहे हैं। कहा कि शंकराचार्यों का मनोनयन नहीं होता, अभिषेक के बाद ही किसी को शंकराचार्य बनाया जा सकता है।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ से जारी बयान में स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि वासुदेवानंद शंकराचार्य नहीं हैं। उन्होंने फर्जी वसीयतों के आधार पर सबको गुमराह किया और न्यायालय में मात खाई। उन्होंने कहा कि भारत धर्म महामंडल ने ज्योर्तिपीठ पर उनका अभिषेक कराकर न्याय किया है। ऐसा न्यायालय के आदेश पर ही नीयत समय में किया गया है। कहा कि महामंडल के कुछ सदस्य भटक गए हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म का सबसे बड़ा पद है। इस पर वही दंडी संन्यासी आसीन हो सकता है, जो वेद-वेदांग में पारंगत हो। इस पद पर उनका पुर्नअभिषेक शास्त्र सम्मत है। अब ज्योर्तिपीठ पर चयन प्रक्रिया जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। जो लोग चयन प्रक्रिया चला रहे हैं, वे न्यायालय की अवमाना कर रहे हैं। स्वारूपानंद ने कहा कि ज्योर्तिपीठ का शंकराचार्य रहते हुए उन्होंने सभी कार्य धर्मसम्मत किए।
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि जब उन्होंने ज्योतिर्मठ पदभार संभाला था, तब बद्री, केदार मंदिर समिति का ज्योर्तिपीठ से कोई संबंध नहीं था। उनके प्रयासों से समन्वय हुआ और समिति ने उन्हें पीठ का शंकराचार्य माना। ऐसा होने के बाद ही केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की समाधि का जीर्णाद्वार कराया जा सका।
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