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गंगाजी को रखेंगे स्वच्छ, अब समय आ गया
Updated Mon, 08 Jan 2018 10:33 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
सुमेरु साहित्यिक काव्य मंच ने नव वर्ष के स्वागत में काव्या संध्या का आयोजन किया। उन्होंने नए साल में लोगों को शुभ कार्य करने के साथ देश की तरक्की के लिए कार्य करने को आह्वान किया।
सोमवार को शिवलोक कालोनी में काव्य मंच में कवियों ने कविता-पाठ किया। सुमेरु संस्था के संस्थापक आचार्य राधेश्याम सेमवाल ने कवियों को नए साल की शुभकामना दी। उन्होंने कहा कि नव-वर्ष आ गया, नव-वर्ष भा गया देकर कुनकुनी धूप, नव वर्ष छा गया, करें मिलकर विमर्श होगा नव उत्कर्ष, गंगाजी को रखेंगे स्वच्छ, अब समय आ गया।
कार्यक्रम में डा. पुनीता वाजपेयी ने कहा कि मंगलमय हो नव वर्ष सभी का, भाग्य सदा अनुकुल रहे, मन प्रेम-भाव से पूरित हो, खुशियों से आपूरित हो। ज्वालापुरी सैय्यद मुहम्मद सकलैन ने कहा कि रोज आए ख्वाब में, एक भी छुट्टी न हो, जिंदगी की जुस्तजू दिन-रात होनी चाहिए। बृजेंद्र हर्ष ने पढ़ा कि आह निकले जो जिगर से कोई, राह आती नहीं नजर कोई। महेश भट्ट ने पढ़ा कि जो दुर्बल मन रखते, रहें सदा मजबूर, पथ से ओ विचलित रहें, मंजिल से अति दूर। महेंद्र माही ने पढ़ा कि दिखा व्यक्तित्व जो पटरी की तरह सीधा तो, मुझी से नाप ले ली, मुझको ही किनारे रक्खा। सुखपाल सिंह ने पढ़ा कि जिनके जीवन में कष्ट हाहाकार नहीं, जिनको दुखों से साक्षात्कार नहीं। काव्यपाठ के दौरान प्रफुल्ल कुमार ध्यानी, जगदीश शर्मा आदि कवियों ने नववर्ष पर कविता पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश भट्ट व महेंद्र माही ने सरस्वती वंदना के साथ की। काव्य-मंच का संचालन सेमवाल ने किया।
हरिद्वार।
सुमेरु साहित्यिक काव्य मंच ने नव वर्ष के स्वागत में काव्या संध्या का आयोजन किया। उन्होंने नए साल में लोगों को शुभ कार्य करने के साथ देश की तरक्की के लिए कार्य करने को आह्वान किया।
सोमवार को शिवलोक कालोनी में काव्य मंच में कवियों ने कविता-पाठ किया। सुमेरु संस्था के संस्थापक आचार्य राधेश्याम सेमवाल ने कवियों को नए साल की शुभकामना दी। उन्होंने कहा कि नव-वर्ष आ गया, नव-वर्ष भा गया देकर कुनकुनी धूप, नव वर्ष छा गया, करें मिलकर विमर्श होगा नव उत्कर्ष, गंगाजी को रखेंगे स्वच्छ, अब समय आ गया।
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कार्यक्रम में डा. पुनीता वाजपेयी ने कहा कि मंगलमय हो नव वर्ष सभी का, भाग्य सदा अनुकुल रहे, मन प्रेम-भाव से पूरित हो, खुशियों से आपूरित हो। ज्वालापुरी सैय्यद मुहम्मद सकलैन ने कहा कि रोज आए ख्वाब में, एक भी छुट्टी न हो, जिंदगी की जुस्तजू दिन-रात होनी चाहिए। बृजेंद्र हर्ष ने पढ़ा कि आह निकले जो जिगर से कोई, राह आती नहीं नजर कोई। महेश भट्ट ने पढ़ा कि जो दुर्बल मन रखते, रहें सदा मजबूर, पथ से ओ विचलित रहें, मंजिल से अति दूर। महेंद्र माही ने पढ़ा कि दिखा व्यक्तित्व जो पटरी की तरह सीधा तो, मुझी से नाप ले ली, मुझको ही किनारे रक्खा। सुखपाल सिंह ने पढ़ा कि जिनके जीवन में कष्ट हाहाकार नहीं, जिनको दुखों से साक्षात्कार नहीं। काव्यपाठ के दौरान प्रफुल्ल कुमार ध्यानी, जगदीश शर्मा आदि कवियों ने नववर्ष पर कविता पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश भट्ट व महेंद्र माही ने सरस्वती वंदना के साथ की। काव्य-मंच का संचालन सेमवाल ने किया।
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