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बिना सृजित पद के कर दी असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:09 AM IST
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हरिद्वार। संस्कृत विवि में 2016 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति को अब छात्रों ने भी विवि प्रशासन पर आरोप लगाने शुरू कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि विवि में बिना सृजित पद के ही एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति कर दी । जिसकी जांच गंभीरता से कराई जारी चाहिए।
संस्कृत विवि के पूर्व कोषाध्यक्ष अशीष पोखरियाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि विवि के इतिहास विभाग में बिना सृजित पद के एक असिस्टेंट प्रोफेसर की 2016 में नियुक्ति कर दी गई है। जिसके चलते इस असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन वित्ताधिकारी ने कई महीने तक रिलीज नहीं किया था। बाद में विवि प्रशासन और शिक्षकों के दबाव में इस शिक्षक का वेतन जारी किया गया था। जिसका पूर्व छात्र अध्यक्षों द्वारा विरोध किया गया था। अब वही असिस्टेंट प्रोफेसर पूर्व छात्र संघ अध्यक्षों पर अभद्रता का आरोप लगा रहा है। ऐसा केवल पुरानी रंजिश के चलते किया गया है। वहीं संस्कृत विश्वविद्यालय में 2016 में हुई शिक्षकों की नियुक्ति की जांच राज्यपाल के स्तर से गढ़वाल मंडल के आयुक्त से कराई जारी है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने आरोप गलत बताते हुए कहा कि सभी नियुक्तियां नियमानुसार की गई है।
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संस्कृत विवि के पूर्व कोषाध्यक्ष अशीष पोखरियाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि विवि के इतिहास विभाग में बिना सृजित पद के एक असिस्टेंट प्रोफेसर की 2016 में नियुक्ति कर दी गई है। जिसके चलते इस असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन वित्ताधिकारी ने कई महीने तक रिलीज नहीं किया था। बाद में विवि प्रशासन और शिक्षकों के दबाव में इस शिक्षक का वेतन जारी किया गया था। जिसका पूर्व छात्र अध्यक्षों द्वारा विरोध किया गया था। अब वही असिस्टेंट प्रोफेसर पूर्व छात्र संघ अध्यक्षों पर अभद्रता का आरोप लगा रहा है। ऐसा केवल पुरानी रंजिश के चलते किया गया है। वहीं संस्कृत विश्वविद्यालय में 2016 में हुई शिक्षकों की नियुक्ति की जांच राज्यपाल के स्तर से गढ़वाल मंडल के आयुक्त से कराई जारी है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने आरोप गलत बताते हुए कहा कि सभी नियुक्तियां नियमानुसार की गई है।
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