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मातृसदन के स्वामी आत्मबोधानंद जेल से रिहा
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:01 AM IST
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हरिद्वार। मातृसदन के स्वामी आत्मबोधानंद दो दिन बाद बुधवार को जमानत पर जेल से रिहा कर दिए गए। जेल से बाहर आते ही उन्होंने डीएम दीपक रावत पर कई गंभीर लगाए। पत्रकारों से बातचीत में स्वामी आत्मबोधानंद ने कहा कि उनके साथ डीएम दीपक रावत और उनके गनर ने मारपीट की। दूसरी ओर जिलाधिकारी दीपक रावत ने स्वामी आत्मबोधानंद के आरोपों को बेबुनियाद और निराधार करार दिया है।
दो दिन पहले मदन मोहन मालवीय जयंती पर महामना सेवा संस्थान की ओर से ऋषिकुल सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मातृसदन के स्वामी आत्मबोधानंद ने डीएम दीपक रावत को सम्मानित किए जाने का विरोध जताते हुए न सिर्फ हंगामा कर कार्यक्रम स्थल पर पर्चे भी फेंके थे। इस घटना के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। बाद में पुलिस ने शांतिभंग की धाराओं में चालान करते हुए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया था। स्वामी आत्मबोधानंद बुधवार को जमानत पर रिहा कर दिए गए।
लेकिन उनके जेल से रिहा होने के बाद स्वामी आत्मबोधानंद ने पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया है कि उनके विरोध प्रदर्शन के बाद डीएम के आदेश पर उन्हें न सिर्फ हिरासत में लिया गया वरन बंद कमरे में डीएम दीपक रावत और उनके गनर ने पिटाई भी की।
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वहीं खनन के विरोध में अनशन में बैठे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि उन्होंने डीएम द्वारा पिटाई किए जाने का मामले से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को आज ही पत्र भेजा है। पत्र में डीएम के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की मांग की गई है। मातृसदन परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि डीएम के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
दूसरी ओर डीएम दीपक रावत ने मातृसदन संतों के आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। डीएम दीपक रावत का कहना है कि स्वामी आत्मबोधानंद के प्रदर्शन और पर्चे फेंकने के बाद पुलिस ने हिरासत में लेकर शांतिभंग की धाराओं मेें चालान किया जो कानूनों के तहत किया गया। उनका कहना है कि कानून को हाथ लेने की इजाजत किसी को नही दी जा सकती है।
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दो दिन पहले मदन मोहन मालवीय जयंती पर महामना सेवा संस्थान की ओर से ऋषिकुल सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मातृसदन के स्वामी आत्मबोधानंद ने डीएम दीपक रावत को सम्मानित किए जाने का विरोध जताते हुए न सिर्फ हंगामा कर कार्यक्रम स्थल पर पर्चे भी फेंके थे। इस घटना के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। बाद में पुलिस ने शांतिभंग की धाराओं में चालान करते हुए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया था। स्वामी आत्मबोधानंद बुधवार को जमानत पर रिहा कर दिए गए।
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लेकिन उनके जेल से रिहा होने के बाद स्वामी आत्मबोधानंद ने पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया है कि उनके विरोध प्रदर्शन के बाद डीएम के आदेश पर उन्हें न सिर्फ हिरासत में लिया गया वरन बंद कमरे में डीएम दीपक रावत और उनके गनर ने पिटाई भी की।
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वहीं खनन के विरोध में अनशन में बैठे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि उन्होंने डीएम द्वारा पिटाई किए जाने का मामले से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को आज ही पत्र भेजा है। पत्र में डीएम के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की मांग की गई है। मातृसदन परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि डीएम के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
दूसरी ओर डीएम दीपक रावत ने मातृसदन संतों के आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। डीएम दीपक रावत का कहना है कि स्वामी आत्मबोधानंद के प्रदर्शन और पर्चे फेंकने के बाद पुलिस ने हिरासत में लेकर शांतिभंग की धाराओं मेें चालान किया जो कानूनों के तहत किया गया। उनका कहना है कि कानून को हाथ लेने की इजाजत किसी को नही दी जा सकती है।