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श्रद्घा पूर्वक मनाई गई महामना मालवीय की जयंती
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:49 PM IST
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हरिद्वार। महामना मालवीय की जयंती धर्मनगरी में श्रद्घा पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय हमेशा समाज सुधार के कार्यों में लगे रहे। उन्होंने तीर्थ की अव्यवस्थाओं में सुधार किया। इस मौके पर गंगा तट पर सेवा कार्य चलाते हुए सुंदरकांड का पाठ किया गया और अस्पतालों में मरीजों को फल बांटे।
कुशावर्त घाट पर आयोजित कार्यक्रम में महामना के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए गंगा सभा के सभापति कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि महामना ने पिछली शताब्दी में गंगा रक्षा के लिए विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन हरिद्वार में चलाया था। तब गंगा पर बांध बनाने की तैयारी थी, जिसका विरोध करने के लिए पुरोहित समाज ने देशभर में अलख जगाई। अंग्रेजी सत्ता जब बांध रोकने को तैयार नहीं हुए तब महामना के प्रयासों से देश की 32 रियासतों की सेनाएं विरोध के लिए पहुंच गई। परिणाम स्वरूप अंग्रेजों को बांध का प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। तब महामना ने हरिद्वार में गंगा रक्षा के लिए गंगा सभा की स्थापना की और बाद में ऋषिकुुल विद्यापीठ बनाकर शिक्षा जगत में क्रांति की शुरुआत की। आचार्य पंड़ित हरिओम जयवाल शास्त्री ने कहा कि महामना ने पूरा जीवन राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना में लगा दिया। महेश कुुमार वशिष्ठ ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने ही तीर्थों की कुव्यवस्थाओं को सुधारा था।
इस अवसर विनीत दलाल, मोहन लाल सरयै, पवन कुमार गौतम, उमाकांत वशिष्ठ, रमन वशिष्ठ, नत्थूराम सरयै, उमाकांत दीक्षित, विभोर कौशिक, सूरज रामचंद्र, विनय खेवड़िया आदि ने विचार व्यक्त किए। सभा के तटों की सफाई का अभियान चलाया गया। तीर्थ-पुरोहित कर्मकांड शिक्षा समिति द्वारा संचालित आयोजन में तटों पर पड़ी गंदगी पर चिंता जताते हुए इस दिशा में सार्थक कदम उठाने का प्रस्ताव किया गया। बाद में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल तथा ऋषिकुल जा फलों का वितरण संपन्न हुआ। मां गंगा की भव्य आरती भी उतारी गई।
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कुशावर्त घाट पर आयोजित कार्यक्रम में महामना के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए गंगा सभा के सभापति कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि महामना ने पिछली शताब्दी में गंगा रक्षा के लिए विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन हरिद्वार में चलाया था। तब गंगा पर बांध बनाने की तैयारी थी, जिसका विरोध करने के लिए पुरोहित समाज ने देशभर में अलख जगाई। अंग्रेजी सत्ता जब बांध रोकने को तैयार नहीं हुए तब महामना के प्रयासों से देश की 32 रियासतों की सेनाएं विरोध के लिए पहुंच गई। परिणाम स्वरूप अंग्रेजों को बांध का प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। तब महामना ने हरिद्वार में गंगा रक्षा के लिए गंगा सभा की स्थापना की और बाद में ऋषिकुुल विद्यापीठ बनाकर शिक्षा जगत में क्रांति की शुरुआत की। आचार्य पंड़ित हरिओम जयवाल शास्त्री ने कहा कि महामना ने पूरा जीवन राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना में लगा दिया। महेश कुुमार वशिष्ठ ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने ही तीर्थों की कुव्यवस्थाओं को सुधारा था।
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इस अवसर विनीत दलाल, मोहन लाल सरयै, पवन कुमार गौतम, उमाकांत वशिष्ठ, रमन वशिष्ठ, नत्थूराम सरयै, उमाकांत दीक्षित, विभोर कौशिक, सूरज रामचंद्र, विनय खेवड़िया आदि ने विचार व्यक्त किए। सभा के तटों की सफाई का अभियान चलाया गया। तीर्थ-पुरोहित कर्मकांड शिक्षा समिति द्वारा संचालित आयोजन में तटों पर पड़ी गंदगी पर चिंता जताते हुए इस दिशा में सार्थक कदम उठाने का प्रस्ताव किया गया। बाद में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल तथा ऋषिकुल जा फलों का वितरण संपन्न हुआ। मां गंगा की भव्य आरती भी उतारी गई।
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