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उपचारिका पर गिरी लापरवाही की गाज, पोखरी अटैच
Updated Fri, 01 Dec 2017 10:26 PM IST
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कर्णप्रयाग। तीन अक्तूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई प्रसूता की मौत के मामले में स्टाफ नर्स (उपचारिका) पर लापरवाही की गाज गिरी। स्टाफ नर्स को स्वास्थ्य विभाग ने कर्णप्रयाग से हटाकर सीएचसी पोखरी अटैच कर दिया है।
तीन अक्तूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती ग्वाड़ गांव निवासी लक्ष्मी उर्फ गीता की प्रसव के बाद मौत हो गई थी। तब परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। सीएमओ डा. भागीरथी जंगपांगी ने कमेटी बनाकर मामले की जांच करने की बात कही, लेकिन जांच समय पर न होने से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने तीन नवंबर से उमा देवी प्रतीक्षालय पर धरना शुरू कर दिया। इसके बाद विभाग ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसमें पाया गया कि प्रसूता को लगने वाला इंजेक्शन अस्पताल में होने के बावजूद बाहर से मंगाया गया। धरने पर बैठे लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्रवाई का आश्वासन दिलाया और मांग पर कार्रवाई न होने पर स्वयं धरने पर बैठने की बात कही थी। साथ ही विधानसभा सत्र के दौरान घेराव की चेतावनी देकर आंदोलन स्थगित कराया था। अब विभाग ने इस दौरान तैनात स्टाफ नर्स (उपचारिका) संतोष रैंसवाल को सीएचसी से हटाकर सीएचसी पोखरी अटैच कर दिया है। डा. भागीरथी जंगपांगी ने बताया कि जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुरूप कार्रवाई की गई है। वहीं संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सगोई ने कहा कि सरकार को प्रसूता के लिए मुआवजा सहित अन्य सुविधाएं देनी चाहिए।
तीन अक्तूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती ग्वाड़ गांव निवासी लक्ष्मी उर्फ गीता की प्रसव के बाद मौत हो गई थी। तब परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। सीएमओ डा. भागीरथी जंगपांगी ने कमेटी बनाकर मामले की जांच करने की बात कही, लेकिन जांच समय पर न होने से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने तीन नवंबर से उमा देवी प्रतीक्षालय पर धरना शुरू कर दिया। इसके बाद विभाग ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसमें पाया गया कि प्रसूता को लगने वाला इंजेक्शन अस्पताल में होने के बावजूद बाहर से मंगाया गया। धरने पर बैठे लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्रवाई का आश्वासन दिलाया और मांग पर कार्रवाई न होने पर स्वयं धरने पर बैठने की बात कही थी। साथ ही विधानसभा सत्र के दौरान घेराव की चेतावनी देकर आंदोलन स्थगित कराया था। अब विभाग ने इस दौरान तैनात स्टाफ नर्स (उपचारिका) संतोष रैंसवाल को सीएचसी से हटाकर सीएचसी पोखरी अटैच कर दिया है। डा. भागीरथी जंगपांगी ने बताया कि जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुरूप कार्रवाई की गई है। वहीं संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सगोई ने कहा कि सरकार को प्रसूता के लिए मुआवजा सहित अन्य सुविधाएं देनी चाहिए।
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