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कविताओं के माध्यम से गांवों के पलायन का दर्द किया बयां
Updated Sun, 12 Nov 2017 09:58 PM IST
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गोपेश्वर। संयुक्त रामलीला मंच की ओर से रविवार को रामलीला मंचन के दौरान कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्य संस्था कलश से जुड़े कवियों ने कविताओं के माध्यम से सरकारी तंत्र की खामियों पर तंज कसे। साथ ही हास्य कवि मुरली दीवान ने मंगतू की मांगण (मंगतू की शादी की बातचीत) कविता से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। वहीं, रामलीला में सीता हरण का मंचन किया गया।
संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने गढ़वाली बोली के संरक्षण पर जोर दिया। इस दौरान चित्रकार बी मोहन नेगी, शेर सिंह पांगती, अवनींद्र उनियाल और शहीद सूरज तोपल को श्रद्धांजलि भी दी गई। सम्मेलन में कवि मुरली दीवान ने मंगतू की मांगण ह्वैगी, तेजपाल निर्मोही ने जौं पर भारी पीड़ छे हमरी, तौंन रुप्यों पर पीड़ ठैर्याई, मनमोहन भट्ट ने दूर परदेश मां छौं, लठ्याली बौडरों का काख, ललित गुर्साइं ने ह्वोंद खांद बैरी बण्युं, तेरी झूठी माया मां, हाशीम अहमद ने इतना गहरा आंसुओं से तो रिश्ता न था, बृजेश रावत ने फैशनो बुखार, अब गौं बजार, शशि देवली ने अनमोल विभूति है सत्यनिष्ठा, राजकुमार तिवारी ने गौं का गौं खंद्वार ह्वैग्या, सार जयीं बाजा मां, भानू प्रताप सिंह ने स्वर्ग के छोर से देख कविता का पाठ किया। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अंकोला पुरोहित, जिला सहकारी समिति के निदेशक राजेंद्र सिंह नेगी, आयुष चौहान, मनमोहन चतुरा, दर्शन सिंह नेगी और दिनेश सती आदि मौजूद थे।
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