मंजूरी के दशकभर बाद भी नहीं बनी पर्यटन ग्राम की सड़क

Dehradun Bureau Updated Wed, 08 Nov 2017 01:58 AM IST
फोटो फाइल नेम-
मंजूरी के बाद भी नहीं बनी पर्यटन ग्राम की सड़क
-- पगडंडियां नापने को मजबूर हैं नेशनल हाईवे से तीन किमी. दूरी पर बसे गांव के वाशिंदे

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमकेश्वर का पर्यटन ग्राम पटना आवागमन की सुविधा से महरूम है। यह स्थिति तब है जब इस गांव के लिए सड़क की मंजूरी मिले एक दशक बीत चुका है। लिहाजा विभाग के उदासीन रवैये के चलते क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के लोगों व प्राचीन श्री नीलकंठ धाम के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्ग की सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। करीब दशक भर पहले स्वीकृत इस योजना के बनने से नीलकंठ शिवालय के लिए एक बेहतर बाईपास वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है, जिसकी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि व लोक निर्माण विभाग लापरवाह बने हुए हैं।
पर्यटन ग्राम पटना के अंतर्गत विश्व विख्यात पटना वाटर फॉल पड़ता है, जिसमें वर्ष भर देसी ही नहीं विदेशी सैलानियों का भी आवागमन बना रहता है। इस गांव के लिए वर्ष 2007-08 में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के अंतर्गत आठ किमी. पटना-घाईकल संपर्क मार्ग को वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन दस साल बाद भी सड़क का कहीं अता पता नहीं है।
इस मार्ग से पटना तल्ला व पटना मल्ला गांव के अलावा हल्दोगी, सिमलखेत, घाईकल, नागरजा, भादसी गांवों को आवागमन की सुविधा मिलनी थी। इतना ही नहीं पटना-घाईकल मार्ग के निर्माण से प्राचीन नीलकंठ धाम के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी वैकल्पिक व बाईपास मार्ग की सुविधा मिलती। स्थानीय लोगों की मानें तो इस मार्ग के बनने से लक्ष्मणझूला-पीपलकोटी-नीलकंठ मार्ग पर यात्राकाल व अत्यधिक भीड़भाड़ के समय लगने वाले जाम से तीर्थयात्रियों, पर्यटकों के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को भी दुश्वारियों से निजात मिलनी थी, लेकिन लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लापरवाह रवैये के कारण सड़क की स्वीकृति के बाद भी लोग दस साल से पगडंडियां नापने को विवश हैं।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, नीलकंठ मंदिर समिति के सदस्य धन सिंह राणा, स्थानीय निवासी ओमप्रकाश नौटियाल, बंशीलाल, प्रेमलाल कंडवाल आदि ने बताया कि उक्त मार्ग के बनने से ग्रामीणों के साथ ही पर्यटकों को भी लाभ मिलना था। उनका कहना है कि जिला प्रशासन की कमजोर मानिटरिंग के कारण लोगों को स्वीकृति के बावजूद आवागमन की सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण स्थानीय ग्रामीण पगडंडियां नापने को मजबूर हैं जबकि तीर्थयात्रियों को सिंगल रूट होने से अक्सर भीड़भाड़ के समय जाम से जूझना पड़ता है। बावजूद इसके विभाग लापरवाह बना हुआ है।

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