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संसाधनों की कमी से खिलाड़ियों की प्रतिभा हो जाती है दफन

Mon, 06 Nov 2017 01:58 AM IST
Updated Mon, 06 Nov 2017 01:58 AM IST
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संसाधनों की कमी से खिलाड़ियों की प्रतिभा हो जाती है दफन
12वीं तक राष्ट्रीय स्तर के खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद खेलों के लिए नहीं मिल पा रही हैं सुविधाएं
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12 सालों में भारती शिक्षा निकेतन स्कूल के 161 छात्रों ने खेलों में दिखाया दमखम
फोटो :
अमर उजाला ब्यूरो
रायवाला।
अलग राज्य के गठन को 17 साल पूर हो गए। इसका प्रदेश स्तर पर जश्न भी मनाया जा रहा है। इन 17 सालों के दौरान दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों की सरकार बारी-बारी से रही। वोट लेने के लिए नेताओं ने लोगों को तरह-तरह के सब्जबाग दिखाए गए। राज्य के बाशिंदों को मूलभूत सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन सब हवा हवाई साबित हुए।
खेलों के मामले में भी राज्य की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। यहीं वजह है कि यहां की खेल प्रतिभाएं या तो दब जाती हैं या फिर दूसरे राज्यों की ओर रुख कर लेती हैं। सरकार एक तरफ खेलों को उत्साहित करने के दावे करती रहती है, लेकिन खिलाड़ियों को सुविधाएं और मौका न मिलने के कारण उनकी प्रतिभा दब कर रह जाती है। ऐसे ही न्याय पंचायत श्यामपुर के अंतर्गत आने वाले छह गांवों के खिलाड़ियों का हाल है। यहां के 12वीं तक के छात्रों ने बिना संसाधनों के खेलों में राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई। पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन भी किया, लेकिन इसके बाद उन्हें आगे बढ़ने के लिए न सुविधाएं मिलीं और न ही सरकार का खेल विभाग कोई मौका दिला सका। जिससे उनकी प्रतिभा दब कर रह गई। ग्रामसभा चकजोगीवाला के छोटे से स्कूल भारती शिक्षा निकेतन से एक दशक में 161 खिलाड़ी विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय स्तर तक तो पहुंचे, लेकिन सरकारी सहायता, उचित मार्गदर्शन, खेल मैदान, कोच, और वित्तीय संसाधनों के अभाव के चलते इनमें से एक भी खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाया।
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इस विद्यालय के पिछले 12 वर्षों के खेल परिणामों की सूची में अब तक 161 खिलाड़ी राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक तक जीत चुके हैं। यहां प्रधानाचार्य और कोच जठे सिंह चौहान ने बताया की वह किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से पूर्व अपने स्तर पर स्कूल के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए समीपवर्ती ग्रामसभा छिद्दरवाला के खेल मैदान में तैयारी करने जाते हैं। अभिभावकों को भी बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए प्रेरित किया जाता है।
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भूमि देने पर भी नहीं बना खेल मैदान
ग्रामसभा प्रतीतनगर ने वर्ष 2007 में प्रस्ताव पास कर नेशनल हाईवे के समीप पंचायत की भूमि को खेल मैदान बनाने के लिए युवा कल्याण विभाग को हस्तांतरित किया था, जिसके बाद से आस जगी की खेल मैदान मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित होगा लेकिन अभी तक एक ईंट तक नहीं लगी है। ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के चलते चारदीवारी आदि तक नहीं करा पा रही हैं। उप प्रधान दीवान सिंह चौहान ने बताया कि विभाग को लगातार अवगत कराया जा रहा है, बावजूद विभाग मिनी स्टेडियम निर्माण के लिए बजट का अभाव बताकर दस सालों टरकाया जा रहा है।

कोट :
विभाग के पास इतना बजट नहीं होता कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए संसाधन जुटाए जा सके। शासन को बार-बार पत्र लिखने के बावजूद भी बजट नहीं मिल पा रहा है।
- विनीता नौटियाल, ब्लॉक अधिकारी, युवक कल्याण विभाग।
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