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ीएम का आदेश ठेंगे पर, राजस्व अफसरों ने जुर्माने की फाइल को ठंडे बस्ते में डाला
Updated Wed, 01 Nov 2017 10:58 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पथरी।
डीएम के सख्त दिशा- निर्देश के बावजूद तहसील प्रशासन दो माह बाद भी खेतों से अनुमति से अधिक मिट्टी का खनन करने वालों से जुर्माना नहीं वसूल पाया है। सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के चलते तहसील प्रशासन जुर्माना वसूलने में कतरा रहा है।
डीएम दीपक रावत ने दो माह पहले खेतों से अनुमति से अधिक मिट्टी का खनन करने वालों पर जुर्माना वसूलने आदेश जारी किया था। फेरूपुर के उप प्रधान गिरवर सिंह ने डीएम को पत्र देकर कई लोगों पर खेतों में अनुमति से अधिक मिट्टी का खनन करने व दस फीट से लेकर पंद्रह फीट तक गहरे गड्ढे करने का आरोप लगाया था। जिस पर डीएम ने तहसील प्रशासन से मामले की जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए थे। खेत मालिकों को जुर्माने की राशि जमा करने के लिए नोटिस भी जारी किए गए। नोटिस मिलने पर इनमें से कुछ लोगों ने डीएम को शपथ पत्र देकर ठेके पर खेत लेने वाले लोगों पर धोखा देने का आरोप लगाया था। बताया जाता है कि मिट्टी का खनन करने के लिए ठेके पर खेत लेने वाले लोगों में दो भाजपा नेता व एक ग्राम प्रधान शामिल है। सूत्रों के मुताबिक तहसील प्रशासन उस समय इन तीनों लोगों के विरुद्ध खनन एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहा था। बताया जाता है कि तीनों ने कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाना शुरू कर दिया । जिस पर जुर्माने की कार्रवाई भी नहीं हो सकी और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पथरी।
डीएम के सख्त दिशा- निर्देश के बावजूद तहसील प्रशासन दो माह बाद भी खेतों से अनुमति से अधिक मिट्टी का खनन करने वालों से जुर्माना नहीं वसूल पाया है। सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के चलते तहसील प्रशासन जुर्माना वसूलने में कतरा रहा है।
डीएम दीपक रावत ने दो माह पहले खेतों से अनुमति से अधिक मिट्टी का खनन करने वालों पर जुर्माना वसूलने आदेश जारी किया था। फेरूपुर के उप प्रधान गिरवर सिंह ने डीएम को पत्र देकर कई लोगों पर खेतों में अनुमति से अधिक मिट्टी का खनन करने व दस फीट से लेकर पंद्रह फीट तक गहरे गड्ढे करने का आरोप लगाया था। जिस पर डीएम ने तहसील प्रशासन से मामले की जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए थे। खेत मालिकों को जुर्माने की राशि जमा करने के लिए नोटिस भी जारी किए गए। नोटिस मिलने पर इनमें से कुछ लोगों ने डीएम को शपथ पत्र देकर ठेके पर खेत लेने वाले लोगों पर धोखा देने का आरोप लगाया था। बताया जाता है कि मिट्टी का खनन करने के लिए ठेके पर खेत लेने वाले लोगों में दो भाजपा नेता व एक ग्राम प्रधान शामिल है। सूत्रों के मुताबिक तहसील प्रशासन उस समय इन तीनों लोगों के विरुद्ध खनन एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहा था। बताया जाता है कि तीनों ने कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाना शुरू कर दिया । जिस पर जुर्माने की कार्रवाई भी नहीं हो सकी और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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