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बृहस्पति हुए अस्त, शुक्र 15 दिसंबर को होंगे
Updated Fri, 13 Oct 2017 10:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
इसे संयोग ही कहा जाएगा कि एक ओर सभी देवता विष्णु के साथ शयन पर हैं और इसी बीच गुरु भी अस्त हो गए हैं। बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना गया है। अनोखी बात यह भी है कि दैत्यों के गुरु शुक्र अभी जागृत हैं और उनका अस्त देवोत्थान के बाद 15 दिसंबर को होगा।
गुरु के अस्त होने पर दीपावली होने के बावजूद नए मुहूर्त कम ही निकलते हैं। गुरु अस्त के चलते रोकणा की रस्में भी रुकी रहती हैं। गुरु अस्त होने का असर चूंकि सभी ग्रहों पर पड़ता है, इसलिए पहले से ही शयन पर गए देव विशेष मुहूर्त नहीं निकाल पाते। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार धरतेरस के दिन सूर्य तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसा होने से त्रयोदशी, प्रदोष और संक्रांति तीनों एक ही दिन पड़ेंगे। सूर्य के नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी में विशेष संयोग बन जाएगा। धर्मसार के अनुसार इस दिन की गई कमाई सात गुणा बढ़ जाती है। यही दिन औषध प्राप्त करने का भी दिन है। ऐसे योग में यदि असाध्य रोग को इलाज प्रारंभ किया जाए तो विशेष लाभ मिल जाता है। संक्रांति का पुण्य काल पूरे दिन बना रहेगा। गुरु के अस्त होने के बाद जब देव जागरण हो जाएगा, तब से मुहूर्त निकलने शुरू हो जाएंगे। ऐसा विष्णु जागरण के कारण होता है जो इस सृष्टि के रचने वाले हैं।
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बृहस्पति के अस्त होने पर आकाशीय ग्रह मंडल प्रभावित होगा। यह इसलिए भी शुभ कार्यों के लिए बाधक बना रहेगा, चूंकि दैत्य गुरु शुक्राचार्य उदित्त हैं। शुक्रास्त पौष के महीने में 15 दिसंबर को होगा। इस बार शुक्र जल्दी ही दो जनवरी को उदित हो जाएंगे। गुरु और शुक्र दोनों के आकाशीय मंडल में बने रहने पर धरती के संकट कम होते हैं। उन्हीं दिनों सूर्य भी ताप बढ़ाने वाली मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
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