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गरु का स्थान सर्वोपरि: बलवंत सिंह
Updated Wed, 06 Sep 2017 10:15 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
तीजीपातशाही के गुरु अमरदास की तपस्थली सतीघाट कनखल स्थित डेरा बाबा दरगाह सिंह में ज्योति जोत समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान ब्रह्मलीन महंत साधु सिंह, ब्रह्मलीन महंत जसविंद्र सिंह आदि महापुरुषों की बरसी मनाई गई। शबद कीर्तन और संतवाणी के साथ ही अखंड पाठ का भोग तथा भंडारे का आयोजन भी किया गया।
गुरु अमरदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए निर्मल अखाड़ा के सचिव महंत बलवंत सिंह ने कहा कि गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु के बिना मानव का जीवन अधूरा है। सिख सनातन धर्म गुरुओं की आस्था पर आधारित है। जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कनखल को आस्था का तीर्थ बताते हुए कहा कि भगवान शिव श्रावण मास पर्यंत कनखल में निवास कर सृष्टि का संचालन करते हैं और राजा दक्ष प्रजापति के साथ ही गुरु अमरदास ने जिस गंगा तट पर तप साधना की यह स्थान आज भी व्यक्ति के अशांत चित्त को शांति देता है।
श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा और पितृपक्ष का श्राद्ध कर्म व्यक्ति को पितृदोष से मुक्त करता है। डेरा बाबा दरगाह सिंह के महंत रंजय सिंह एवं बीबी बिनिंदर कौर को धर्मरक्षा प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि इन्होंने जिस प्रकार इस पावन तीर्थ की मर्यादा को कायम किया वह प्रेरणा का काम कर रहा है। महंत रंजय सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो संस्कार दिए और धर्मरक्षा के जिस सेवा प्रकल्पों के संचालन का जो दायित्व सौंपा है उसके लिए संतों के मार्गदर्शन में हरसंभव कार्य किया जाएगा।
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महंत जगजीत सिंह ने कहा कि हरिद्वार धार्मिक नगरी कहलाई जाती है और वहीं हरिद्वार को मोक्ष नगरी भी कहा जाता है। स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदा जीवन में सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। इस दौरान अतुल शर्मा, डा. संजय वर्मा, अनिल शर्मा, सुनील कुमार गुड्डू, नीरव साहू, बलराज सिंह ने स्वागत किया। इस अवसर पर सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी शरद पुरी महाराज, महंत गोपाल सिंह, स्वामी चिद्विलासानंद, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, महंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री, महंत बलवंत सिंह, स्वामी श्याम सुंदर दास शास्त्री, महंत गुरमीत सिंह, मुखिया महंत जगजीत सिंह, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत मोहन सिंह, महंत प्रेमदास, महंत कृष्णानंद, महंत रामस्वरूप भी उपस्थित थे।
हरिद्वार।
तीजीपातशाही के गुरु अमरदास की तपस्थली सतीघाट कनखल स्थित डेरा बाबा दरगाह सिंह में ज्योति जोत समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान ब्रह्मलीन महंत साधु सिंह, ब्रह्मलीन महंत जसविंद्र सिंह आदि महापुरुषों की बरसी मनाई गई। शबद कीर्तन और संतवाणी के साथ ही अखंड पाठ का भोग तथा भंडारे का आयोजन भी किया गया।
गुरु अमरदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए निर्मल अखाड़ा के सचिव महंत बलवंत सिंह ने कहा कि गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु के बिना मानव का जीवन अधूरा है। सिख सनातन धर्म गुरुओं की आस्था पर आधारित है। जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कनखल को आस्था का तीर्थ बताते हुए कहा कि भगवान शिव श्रावण मास पर्यंत कनखल में निवास कर सृष्टि का संचालन करते हैं और राजा दक्ष प्रजापति के साथ ही गुरु अमरदास ने जिस गंगा तट पर तप साधना की यह स्थान आज भी व्यक्ति के अशांत चित्त को शांति देता है।
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श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा और पितृपक्ष का श्राद्ध कर्म व्यक्ति को पितृदोष से मुक्त करता है। डेरा बाबा दरगाह सिंह के महंत रंजय सिंह एवं बीबी बिनिंदर कौर को धर्मरक्षा प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि इन्होंने जिस प्रकार इस पावन तीर्थ की मर्यादा को कायम किया वह प्रेरणा का काम कर रहा है। महंत रंजय सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो संस्कार दिए और धर्मरक्षा के जिस सेवा प्रकल्पों के संचालन का जो दायित्व सौंपा है उसके लिए संतों के मार्गदर्शन में हरसंभव कार्य किया जाएगा।
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महंत जगजीत सिंह ने कहा कि हरिद्वार धार्मिक नगरी कहलाई जाती है और वहीं हरिद्वार को मोक्ष नगरी भी कहा जाता है। स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदा जीवन में सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। इस दौरान अतुल शर्मा, डा. संजय वर्मा, अनिल शर्मा, सुनील कुमार गुड्डू, नीरव साहू, बलराज सिंह ने स्वागत किया। इस अवसर पर सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी शरद पुरी महाराज, महंत गोपाल सिंह, स्वामी चिद्विलासानंद, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, महंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री, महंत बलवंत सिंह, स्वामी श्याम सुंदर दास शास्त्री, महंत गुरमीत सिंह, मुखिया महंत जगजीत सिंह, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत मोहन सिंह, महंत प्रेमदास, महंत कृष्णानंद, महंत रामस्वरूप भी उपस्थित थे।