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देवराड़ा मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हुई मां नंदा
Updated Tue, 05 Sep 2017 10:43 PM IST
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थराली। परंपरानुसार और वैदिक मंत्रोचारण के साथ मां नंदा देवराड़ा मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हो गईं। इस दौरान देवराड़ा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा। लोगों ने मां नंदा की पूजा की और पश्वाओं ने देवनृत्य कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। अब यहां अगले छह माह तक मां नंदा की पूजा होगी। छह माह पूरे होने पर मां नंदा डोली में बैठकर कुरूड़ के लिए रवाना होंगी।
देवराड़ा गांव में मां नंदा का मंदिर है और नंदा को बधाण की ईष्ट देवी माना जाता है। हर वर्ष यहां देवी नंदा की लोकजात यात्रा घाट के कुरूड़ से शुरू होती है, जिसके बाद देवी छह माह तक देवराड़ा में प्रवास करती हैं। देवराड़ा को मां नंदा का ननिहाल माना जाता है। मंगलवार को सुबह नौ बजे मां नंदा देवी बैनोली गांव से लोल्टी गांव के लिए रवाना र्हुइं। यहां कस्बीनगर, तुंगेश्वर सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने देवी की आराधना की। इसके बाद करीब पौने पांच बजे देवी की डोली देवराड़ा मंदिर परिसर पहुंची। यहां ग्वाड़, सुनाऊं, मालबज्वाड़, देवल, भेंटा और किमनी सहित आसपास के 50 से अधिक गांवों के लोग सुबह से नंदा का इंतजार कर रहे थे। जब मंदिर परिसर में मां नंदा की डोली पहुंची तो ग्रामीणों और महिलाओं ने नंदा के जागर और पारंपरिक मांगल गीत गाए। इसके बाद देवी की डोली और देव पश्वाओं ने देवनृत्य किया। शाम पांच बजकर पैंतीस मिनट पर परंपरानुसार और वैदिक मंत्रोचारण के साथ देवी नंदा ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया। इस दौरान मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल, पारेश्वर प्रसाद देवराड़ी, महिला मंगल दल अध्यक्ष गौरी देवी, केदार दत्त पंत, मालदत्त पंत, प्रताप सिंह, अव्वल सिंह, गजेंद्र सिंह, मुख्य पुजारी मंशाराम गौड़, कन्हैया प्रसाद, राजेश गौड़, लाल सिंह, मदन सिंह और भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
देवराड़ा गांव में मां नंदा का मंदिर है और नंदा को बधाण की ईष्ट देवी माना जाता है। हर वर्ष यहां देवी नंदा की लोकजात यात्रा घाट के कुरूड़ से शुरू होती है, जिसके बाद देवी छह माह तक देवराड़ा में प्रवास करती हैं। देवराड़ा को मां नंदा का ननिहाल माना जाता है। मंगलवार को सुबह नौ बजे मां नंदा देवी बैनोली गांव से लोल्टी गांव के लिए रवाना र्हुइं। यहां कस्बीनगर, तुंगेश्वर सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने देवी की आराधना की। इसके बाद करीब पौने पांच बजे देवी की डोली देवराड़ा मंदिर परिसर पहुंची। यहां ग्वाड़, सुनाऊं, मालबज्वाड़, देवल, भेंटा और किमनी सहित आसपास के 50 से अधिक गांवों के लोग सुबह से नंदा का इंतजार कर रहे थे। जब मंदिर परिसर में मां नंदा की डोली पहुंची तो ग्रामीणों और महिलाओं ने नंदा के जागर और पारंपरिक मांगल गीत गाए। इसके बाद देवी की डोली और देव पश्वाओं ने देवनृत्य किया। शाम पांच बजकर पैंतीस मिनट पर परंपरानुसार और वैदिक मंत्रोचारण के साथ देवी नंदा ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया। इस दौरान मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल, पारेश्वर प्रसाद देवराड़ी, महिला मंगल दल अध्यक्ष गौरी देवी, केदार दत्त पंत, मालदत्त पंत, प्रताप सिंह, अव्वल सिंह, गजेंद्र सिंह, मुख्य पुजारी मंशाराम गौड़, कन्हैया प्रसाद, राजेश गौड़, लाल सिंह, मदन सिंह और भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
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