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गंगा सभा की चुप्पी पर खुद मुखर हुआ पुरोहित समाज
Updated Sat, 19 Aug 2017 11:07 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गंगा को नहर घोषित करने और उस पर हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा की ओर से चुप्पी साधने के बाद अब सभा में बगावत के आसार पैदा हो गए हैं। करीब 51 तीर्थ पुरोहितों ने देहरादून में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर मांग की है कि पिछली सरकार की ओर से अंतिम समय में जारी किया गया शासनादेश तत्काल निरस्त किया जाए। दो-दो बार प्रस्ताव पारित करने के बाद गंगा सभा की ओर से विरोध पत्र तक न भेजने पर अब सैकड़ों पुरोहित आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
तीर्थ पुरोहित समाज के प्रधान सभा सदस्य सुरेंद्र मारवाड़ी, आचार्य करुणेश मिश्र, सुरेश श्रोत्रिय, रामकुमार गौतम, अंबरीष पंडा, रमाकांत कीर्तिपाल, गोपाल गोस्वामी, राकेश चाकलान आदि 51 पुरोहितों ने मुख्यमंत्री को देहरादून जाकर विरोध पत्र दिया। इसके साथ अनेक पृष्ठों वाले संलग्नक भी उन्हें सौंपे गए हैं। इन दस्तावेजों में स्कंद पुराण के केदार खंड में दर्ज हरकी पैड़ी और गंगा का तमाम इतिहास शामिल है। इसी के साथ प्रधानमंत्री, यूपी के मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा तथा गंगा सभा को ज्ञापन सौंपे गए है। मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जो काम ब्रिटिश सत्ता और मुगल भी नहीं कर पाए वह हरीश रावत सरकार ने अध्यादेश लाकर किया। करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं गंगा केे नहर बताने से पीड़ित हुई है। हरकी पैड़ी वही स्थल है जहां महात्मा गांधी, डा. राजेंद्र प्रसाद, पंडित नेहरू आदि अनेक बार आते रहे हैं। मांग की गई है कि मुख्यमंत्री तत्काल पिछले शासनादेश को निरस्त कर हरकी पैड़ी पर बहने वाले जल को गंगा घोषित करें। ज्ञापन में कहां गया है कि भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की नीयत से जारी शासनादेश को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो हरिद्वार का तीर्थ पुरोहित समाज अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ कर देगा। अखिल भारतीय पुरोहित महासभा पहले ही ऐसा प्रस्ताव मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भेज चुकी है।
गंगा सभा के तीनों पदाधिकारियों की ओर से शासनादेश हटाने से संबंधित प्रस्ताव शासन को न भेजे जाने से सभा में बगावत के हालात पैदा हो गए है। सभा में विपक्ष के नेता और गंगा के सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी का खेमा वर्तमान सत्तारूढ़ पुरोहितों के खिलाफ आंदोलन की योजना बना रहा है। वहीं, वर्तमान पदाधिकारियों के खेमे से आए वीरेंद्र कीर्तिपाल आदि नेता आंदोलन को तैयार हैं। कीर्तिपाल ने कहा कि यदि अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा और महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने तत्काल देहरादून जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन न दिया तो उनके खिलाफ भी आंदोलन किया जाएगा। गंगा की अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। उधर सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बिष्ट ने भी इसी आशय से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने शहरी विकास विभाग से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
हरिद्वार।
गंगा को नहर घोषित करने और उस पर हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा की ओर से चुप्पी साधने के बाद अब सभा में बगावत के आसार पैदा हो गए हैं। करीब 51 तीर्थ पुरोहितों ने देहरादून में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर मांग की है कि पिछली सरकार की ओर से अंतिम समय में जारी किया गया शासनादेश तत्काल निरस्त किया जाए। दो-दो बार प्रस्ताव पारित करने के बाद गंगा सभा की ओर से विरोध पत्र तक न भेजने पर अब सैकड़ों पुरोहित आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
तीर्थ पुरोहित समाज के प्रधान सभा सदस्य सुरेंद्र मारवाड़ी, आचार्य करुणेश मिश्र, सुरेश श्रोत्रिय, रामकुमार गौतम, अंबरीष पंडा, रमाकांत कीर्तिपाल, गोपाल गोस्वामी, राकेश चाकलान आदि 51 पुरोहितों ने मुख्यमंत्री को देहरादून जाकर विरोध पत्र दिया। इसके साथ अनेक पृष्ठों वाले संलग्नक भी उन्हें सौंपे गए हैं। इन दस्तावेजों में स्कंद पुराण के केदार खंड में दर्ज हरकी पैड़ी और गंगा का तमाम इतिहास शामिल है। इसी के साथ प्रधानमंत्री, यूपी के मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा तथा गंगा सभा को ज्ञापन सौंपे गए है। मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जो काम ब्रिटिश सत्ता और मुगल भी नहीं कर पाए वह हरीश रावत सरकार ने अध्यादेश लाकर किया। करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं गंगा केे नहर बताने से पीड़ित हुई है। हरकी पैड़ी वही स्थल है जहां महात्मा गांधी, डा. राजेंद्र प्रसाद, पंडित नेहरू आदि अनेक बार आते रहे हैं। मांग की गई है कि मुख्यमंत्री तत्काल पिछले शासनादेश को निरस्त कर हरकी पैड़ी पर बहने वाले जल को गंगा घोषित करें। ज्ञापन में कहां गया है कि भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की नीयत से जारी शासनादेश को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो हरिद्वार का तीर्थ पुरोहित समाज अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ कर देगा। अखिल भारतीय पुरोहित महासभा पहले ही ऐसा प्रस्ताव मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भेज चुकी है।
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गंगा सभा के तीनों पदाधिकारियों की ओर से शासनादेश हटाने से संबंधित प्रस्ताव शासन को न भेजे जाने से सभा में बगावत के हालात पैदा हो गए है। सभा में विपक्ष के नेता और गंगा के सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी का खेमा वर्तमान सत्तारूढ़ पुरोहितों के खिलाफ आंदोलन की योजना बना रहा है। वहीं, वर्तमान पदाधिकारियों के खेमे से आए वीरेंद्र कीर्तिपाल आदि नेता आंदोलन को तैयार हैं। कीर्तिपाल ने कहा कि यदि अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा और महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने तत्काल देहरादून जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन न दिया तो उनके खिलाफ भी आंदोलन किया जाएगा। गंगा की अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। उधर सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बिष्ट ने भी इसी आशय से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने शहरी विकास विभाग से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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