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तीसरे सोमवार को भोलेनाथ के मनभावन स्वरूप का दर्शन

Mon, 24 Jul 2017 10:06 PM IST
Updated Mon, 24 Jul 2017 10:06 PM IST
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तीसरे सोमवार को भोलेनाथ के मनभावन स्वरूप का दर्शन

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्रावण मास के तीसरे सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष के मनभावन स्वरूप का अभिषेक किया। श्रावण की कांवड़ का जल चढ़ा जाने बावजूद हजारों कांवड़िए इस समय नगर में मौजूद हैं। जलाभिषेक के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने चार पहर की पूजा भी की।
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भगवान के अलग-अलग स्वरूपों का अभिषेक श्रद्धालु करते रहे हैं। पहले सोमवार को प्रार्दुभाव स्वरूप का दर्शन हुआ था और दूसरे सोमवार को शिव पार्वती स्वरूप का दर्शन। मनभावन स्वरूप के रूप में अभिषेक करते हुए श्रद्धालु शिव, सती और पार्वती के मनोहारी स्वरूप का स्मरण करते हैं। शिव मंदिरों में गणेश, कार्तिकेय, नंदीश्वर आदि का भी अर्चन किया जाता है। मान्यता है कि शिव की पूजा तब तक अधूरी है, जब तक द्वार पर बैठे नंदी का पूजन न कर लिया जाए। भक्तों ने कनखल के दक्षेश्वर मंदिर में श्वेत कमल, रक्तिम गुलाब, कनेर के फूल आदि चढ़ाकर भोलेनाथ को रिझाया। भांग, धतूरे, घी, शहद, दही,दूध आदि से भी अभिषेक किया गया। इसी प्रकार दरिद्रता निवारण के लिए भक्तों ने दरिद्रभंजन तथा दुखों के विनाश के लिए दुखभंजन मंदिरों में जाकर मनभावन स्वरूप का अभिषेक किया। तिलभांडेश्वर मंदिर में भी जल चढ़ाया गया। इस मंदिर में शिवलिंग का आकार पक्ष के अनुसार घटता बढ़ता है। विशेष रूप से गंगा के किनारे स्थित इस मंदिर में भक्त ताजा जल भरकर अभिषेक करते हैं।
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हरिद्वार के गौरी शंकर, नीलेश्वर, बिल्वकेश्वर आदि मंदिरों में भी परंपराओं के हिसाब से जलाभिषेक किया गया। अन्य दर्जनों मंदिरों में पूर्व की भांति अभिषेक हुआ और भोलेनाथ के संकीर्तनों का आयोजन किया गया। महामृत्युंजय तथा अर्धनारीश्वर की प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार हुआ। विगत शिव चौदस पर जल चढ़ जाने के बावजूद हजारों कांवड़िए प्रतिदिन जल भरने आ रहे हैं। विशेष रूप से मध्य उत्तर प्रदेश वालों की भीड़ लगी है। अन्य राज्यों से भी वे कांवड़िए जल भर रहे हैं, जो भीड़ से बचने के लिए शुक्ल पक्ष में जलाभिषेक करने आते हैं। कांवड़ियों का आगमन अभी थमने वाला नहीं है। अगले महीने में भी विभिन्न राज्यों के पीत वस्त्रधारी कांवड़ियों का आगमन गंगा पर के रास्ते होगा।
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