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मैदान बने विश्रामालय, खुले में शौच
Updated Wed, 19 Jul 2017 10:18 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कांवड़ यात्रा के इस दौर में मेला मैदान से लेकर स्कूल- कालेजों के क्रीड़ा मैदान भी कांवड़ियों के काम आ रहे हैं। विश्राम का स्थान न मिलने पर कांविड़ए मैदानों में फैल गए हैं। पर्याप्त शौचालय नहीं होने पर मैदानों और गंगा तटों पर कांवड़िए खुले में शौच को मजबूर हैं। तटीय क्षेत्रों की सफाई का कोई प्रबंध किसी भी विभाग ने नहीं किया। ऐसे में जहां तहां गंदगी फैली है।
कांवड़ मेले को देखते हुए प्रशासन ने बीस किमी क्षेत्र में टिन के महज करीब 100 शौचालय ही बनाए हैं। जिस प्रकार कांवड़िए रात्रि शयन, कांवड़ निर्माण, भोजन पकाने आदि के लिए मैदानों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे ही खुले मैदानों में शौच भी जा रहे हैं। पूरी रात अंधेरे में तो गंगा तट तक को शौचालय में बदल दिया जाता हैं। कांवड़ पटरी मार्ग पर दूर- दूर तक गंदगी फैली हुई है और कई जगह तो भारी दुर्गंध आ रही है। प्रशासन की नजर इंद्र देव पर है कि बारिश हो तो लाखों कांवड़ियों का मल खुद ही बहकर गंगा में समाहित हो जाए। कांवड़िए स्कूलों के अहातों के साथ-साथ अब अस्पताल आदि के मैदानों में भी प्रवेश कर गए हैं। यहां तक कि नगर निगम के मैदानों में भी कांवड़ियों के डेरे जमे हुए हैं।
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आमतौर पर जल चढ़ने के बाद अमावस्या के दिन तेज वर्षा पंचपुरी में होती रही है। यदि वर्षा न आई तो निश्चय ही महामारी फैलने का खतरा बन जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गंदगी पर चूना तक डालने का इंतजाम नहीं किया गया है। ऐसे में कांवड़ मेला क्षेत्र में भीषण गंदगी बनी हुई है। मजबूरी यह है कि स्थानाभाव में डाक वाहनों में आए कांवड़ियों को अपने वाहनों के साथ मैदानों में ही शरण लेनी पड़ रही है।
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