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कावंड़ मेले में पुलिस कप्तानों ने किए गए प्रयोग
Updated Wed, 19 Jul 2017 10:14 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कावंड़ मेला जिले के पुलिस कप्तान का भी कद तय करता है। इस मेले को सकुशल संपन्न कराना बड़ी चुनौती होता है। इन चुनौतियों के बीच कुछ ऐसे चेहरे ऐसे भी याद आते हैं, जिन्होंने कांवड़ मेले की व्यवस्था में नए प्रयोग कर उन्हें सफलता के साथ क्रियान्वित किया है। वर्ष 2010 में पुलिस कप्तान रहे और वर्तमान में आईजी संजय गुंज्याल ने कांवड़ पटरी का संचालन शुरू कराया था। उसके बाद कांवड़ पटरी का संचालन करने की हिम्मत दूसरे पुलिस कप्तानों ने भी उठाई।
कांवड़ पटरी का संचालन भी आसान नहीं था। ठीक वैसे ही डाक कांवड़ के सैलाब को समेटने का भी विकल्प नहीं था। ऐसे में वर्ष 2012 में पुलिस कप्तान रहे और वर्तमान में आईआरबी द्वितीय के सेनानायक अरुण मोहन जोशी ने दूर तक फैले बैरागी कैंप को डाक कांवड़ के लिए उपयुक्त मानते हुए सकुशल संचालन कर लोहा मनवाया। उसके बाद तो डाक कांवड़ का मतलब मानो बैरागी कैंप हो गया। अरुण मोहन जोशी बैरागी कैंप की खोज न करते तो डाक कांवड़ से शहर कई दिन तक जाम में ही फंसा रहता। पुलिस कप्तान रहे सदानंद दाते, स्वीटी अग्रवाल ने भी कांवड़ को सकुशल संपन्न कराया, बाकी पुलिस कप्तानों के समय में जैसे- तैसे कांवड़ मेला संपन्न होता रहा। मगर, इस बार हाईवे, गंगनहर पटरी पर पूरी अव्यवस्था का बोलबाला ही रहा।
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