Uttarakhand Weather: मानसून की पहली बारिश से 15 मार्ग बंद, नदियों का जलस्तर बढ़ने से अटकी सासें
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार चार राज्य मार्ग सहिया-क्वानू मोटर मार्ग, तारलीखुड, कोठा बैंड, हरिपुर इच्छाडी क्वानू मिनस मोटर मार्ग, चकराता लाखमंडल मोटर मार्ग और दारगाड-कथियान मोटर मार्ग भू-स्खलन होने से बंद हो गए।
विस्तार
मानसून के उत्तराखंड में कदम रखते ही लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। देहरादून जिले में रविवार तड़के से शुरू हुई बारिश रुक-रुककर पूरे दिन जारी रही। इससे सड़कों पर मलबा आने, भू-स्खलन और भू धंसाव के कारण जिले में 15 मोटर मार्गाें पर यातायात बंद हो गया। साथ ही नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान के आसपास आ गया, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों की सांसें अटकी रहीं।
उधर, दून में बारिश के कारण पारा छह डिग्री लुढ़क कर 26 डिग्री पर पहुंच गया। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार चार राज्य मार्ग सहिया-क्वानू मोटर मार्ग, तारलीखुड, कोठा बैंड, हरिपुर इच्छाडी क्वानू मिनस मोटर मार्ग, चकराता लाखमंडल मोटर मार्ग और दारगाड-कथियान मोटर मार्ग भू-स्खलन होने से बंद हो गए।
तीन नदियों का जलस्तर बढ़ा
वहीं, एक मुख्य जिला मार्ग कालसी बैराज खाई मोटर मार्ग समेत एक अन्य जिला मार्ग खारसी मोटर मार्ग मलबा आने से बंद रहे। उधर, ग्रामीण मार्ग मौलधार-सेरकी-सिल्ला मोटर मार्ग, पुरोडी हयो टगरी, बना चिल्हार मोटर मार्ग्र डिमिच मोटर मार्ग, दमन से देसऊ मोटर मार्ग, परिहार से सिमोग मोटर मार्ग, खारसी मोटर मार्ग और पिवनाल मोटर मार्ग बंद हो गए। सहस्त्रधारा-कार्लीगाड-सरोना मोटर मार्ग सड़क धंसने से बंद रहा।
इसके अलावा जिले की तीन नदियों का जलस्तर बढ़ गया। त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी, डाकपत्थर पर यमुना नदी और इच्छाड़ी की टोंस नदी का जल स्तर खतरे के निशान के आसपास पहुंच गया। जानकारी के अनुसार गंगा नदी का स्तर 338.25 मीटर पहुंच गया। जबकि खतरे का निशान 340.50 मीटर है। यमुना नदी का जल स्तर खतरे के निशान से सिर्फ .55 मीटर नीचे 454.82 मीटर पर रहा। टोंस नदी का जलस्तर करीब खतरे के निशान पर 644.60 मीटर रहा।
ऋषिकेश में हुई भारी तो दून में औसत से अधिक बारिश
ऋषिकेश-73.5
विकासनगर-71
चंद्रबनी-54
-कोटी-50.5
जौलीग्रांट-47
ऋषिकेश-42
दून शहर-39.5
रायवाला-33.5
सहस्त्रधारा-31.5
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बारिश में बच्चों का रखें ख्याल
बारिश का मौसम कई तरह की बीमारियां लेकर भी आता है। खासकर, छोटे बच्चों की देखरेख में लापरवाही से वह बीमार पड़ जाते हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार का कहना है सबसे पहले बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए बारिश में भीगने से बचाना चाहिए। बारिश में ज्यादा देर तक बच्चों के भीगने और गीले कपड़े पहने रखने से सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया और डायरिया की शिकायत होने लगती है।