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जौनसार बावर में सेब उत्पादन का जबरदस्त उछाल
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:53 AM IST
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जौनसार बावर में सेब उत्पादन का जबरदस्त उछाल
ब्यूरो/अमर उजाला/ त्यूनी।
देहरादून जिले के जौनसार बावर परगना क्षेत्र में सेब उत्पादन के दायरे में जबरदस्त उछाल हुआ है। यहां के काश्तकार पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से सीख लेते हुए व्यावसायिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसके चलते अब जौनसार बावर परगना क्षेत्र सेब उत्पादन में अग्रणीय हो गया है।
जौनसार बावर क्षेत्र सेब उत्पादन में खास पहचान बना चुका है। बीते पांच साल में सेब उत्पादन का दायरा 1000 हेक्टेयर से बढ़कर 1500 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसके अलावा काश्तकारों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। वर्तमान में 8500 काश्तकारों की आजीविका का मुख्य स्रोत सेब उत्पादन बन चुका है। इस बार क्षेत्रीय काश्तकारों ने उद्यान विभाग से करीब 90 हजार पौधों की डिमांड की है। जो अब तक की सबसे बड़ी डिमांड हैं। इन पौधों को 110 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपा जाएगा। उद्यान प्रभारी त्यूनी आरपी जसोला का कहना है कि जौनसार बावर के काश्तकार पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से सीख लेते हुए व्यावसायिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसके चलते हिमाचल से ज्यादा जौनसार बावर क्षेत्र के सेब की मांग है। क्षेत्र में रॉयल डेलिसस, रेड डेलिसस, गोल्डन डेलिसस प्रजाति के सेब का उत्पादन प्रमुखता से होता है। वहीं काश्तकार वीरेंद्र शर्मा, प्रदीप कुमार, रतन सिंह आदि का कहना है कि विभाग ने रेड चीफ सुपरस्टार के पौधे तैयार किए हैं। ये पौधे कम बर्फबारी में भी अच्छा उत्पादन देते हैं। इसके चलते सेब उत्पादन में जबरदस्त इजाफा हो रहा है।
बीते पांच साल में उत्पादन
वर्ष उत्पादन
2012-13 5500 टन
2013-14 6000 टन
2014-15 7000 टन
2015-16 8500 टन
2016-17 9000 टन
-----------------------------
बागवानी को बढ़ाने के लिए सरकार वह हर संभव प्रयास कर रही है। जिससे काश्तकारों की आमदानी में इजाफा हो सके।
सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री
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ब्यूरो/अमर उजाला/ त्यूनी।
देहरादून जिले के जौनसार बावर परगना क्षेत्र में सेब उत्पादन के दायरे में जबरदस्त उछाल हुआ है। यहां के काश्तकार पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से सीख लेते हुए व्यावसायिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसके चलते अब जौनसार बावर परगना क्षेत्र सेब उत्पादन में अग्रणीय हो गया है।
जौनसार बावर क्षेत्र सेब उत्पादन में खास पहचान बना चुका है। बीते पांच साल में सेब उत्पादन का दायरा 1000 हेक्टेयर से बढ़कर 1500 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसके अलावा काश्तकारों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। वर्तमान में 8500 काश्तकारों की आजीविका का मुख्य स्रोत सेब उत्पादन बन चुका है। इस बार क्षेत्रीय काश्तकारों ने उद्यान विभाग से करीब 90 हजार पौधों की डिमांड की है। जो अब तक की सबसे बड़ी डिमांड हैं। इन पौधों को 110 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपा जाएगा। उद्यान प्रभारी त्यूनी आरपी जसोला का कहना है कि जौनसार बावर के काश्तकार पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से सीख लेते हुए व्यावसायिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसके चलते हिमाचल से ज्यादा जौनसार बावर क्षेत्र के सेब की मांग है। क्षेत्र में रॉयल डेलिसस, रेड डेलिसस, गोल्डन डेलिसस प्रजाति के सेब का उत्पादन प्रमुखता से होता है। वहीं काश्तकार वीरेंद्र शर्मा, प्रदीप कुमार, रतन सिंह आदि का कहना है कि विभाग ने रेड चीफ सुपरस्टार के पौधे तैयार किए हैं। ये पौधे कम बर्फबारी में भी अच्छा उत्पादन देते हैं। इसके चलते सेब उत्पादन में जबरदस्त इजाफा हो रहा है।
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बीते पांच साल में उत्पादन
वर्ष उत्पादन
2012-13 5500 टन
2013-14 6000 टन
2014-15 7000 टन
2015-16 8500 टन
2016-17 9000 टन
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बागवानी को बढ़ाने के लिए सरकार वह हर संभव प्रयास कर रही है। जिससे काश्तकारों की आमदानी में इजाफा हो सके।
सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री