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-फाइलों से बाहर नहीं निकल पाईं वर्षों पुरानी योजनाएं
Updated Thu, 28 Dec 2017 01:13 AM IST
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फाइलों से बाहर नहीं निकल पाईं वर्षों पुरानी योजनाएं
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
तीर्थनगरी क्षेत्र के विकास के लिए वर्षों पुरानी योजनाएं वर्ष-2017 में भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाईं। महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं के तहत क्षेत्र में एक और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना समेत कई योजनाओं को साकार करना था, लेकिन इस दिशा में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के आंदोलनों के बावजूद कोई हल नहीं निकला।
ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में विकास के दावे करने वाले क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि वर्षों से प्रस्तावित कई महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं को वर्ष 2017 में भी धरातल पर नहीं उतार पाए। क्षेत्र में एक और डिग्री कॉलेज, प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था मेें सुधार, जलधारा को घाट पर लाने, तीर्थ स्थलों के विकसित करने, शहर में ट्रंचिंग ग्राउंड समेत कई सुविधाएं मुहैया कराने के बाबत चुनावी मुद्दे तो बने, लेकिन साकार नहीं हो सके। कई योजनाएं तो फाइलों में कैद होकर रह गईं।
क्षेत्र में महाविद्यालय की कमी की यह स्थिति तब है जबकि यहां स्थापित पीजी कॉलेज को ऑटोनामी मिलने के बाद वर्ष 2010-11 में भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने डिग्री कॉलेज की घोषणा की थी। लिहाजा स्थानीय व समीपवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा में दाखिला लेने के लिए डोईवाला, देहरादून, हरिद्वार आदि स्थानों पर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। त्रिवेणीघाट पर मोक्षदायिनी गंगा के दर्शन और नदी की जलधारा को घाट पर लाने की योजना भी वर्षों से लंबित है। इसका प्रस्ताव मॉडल स्टडी से आगे नहीं बढ़ सका। जबकि सूबे के मुख्यमंत्री रहे रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूड़ी के साथ ही विजय बहुगुणा भी गंगा की जलधारा को त्रिवेणी के मुख्यघाट तक लाने की घोषणा कर चुके हैं।
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ये योजनाएं भी हैं लंबित
-शहर को अतिक्रमण मुक्त किया जाना।
-हरिद्वार हाईवे पर रंभा नदी पर संजय झील का निर्माण।
-आस्थापथ को मुनिकीरेती से जोड़ने के लिए स्टील गार्डर ब्रिज निर्माण।
---
ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में लंबित विकास योजनाओं को शुरू कराने और तेजी के साथ उन्हें पूरा कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्याओं के सामने आने व लंबित जरूरी योजनाओं पर तेजी से कार्य किए जा रहे हैं।
प्रेमचंद अग्रवाल, क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
तीर्थनगरी क्षेत्र के विकास के लिए वर्षों पुरानी योजनाएं वर्ष-2017 में भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाईं। महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं के तहत क्षेत्र में एक और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना समेत कई योजनाओं को साकार करना था, लेकिन इस दिशा में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के आंदोलनों के बावजूद कोई हल नहीं निकला।
ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में विकास के दावे करने वाले क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि वर्षों से प्रस्तावित कई महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं को वर्ष 2017 में भी धरातल पर नहीं उतार पाए। क्षेत्र में एक और डिग्री कॉलेज, प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था मेें सुधार, जलधारा को घाट पर लाने, तीर्थ स्थलों के विकसित करने, शहर में ट्रंचिंग ग्राउंड समेत कई सुविधाएं मुहैया कराने के बाबत चुनावी मुद्दे तो बने, लेकिन साकार नहीं हो सके। कई योजनाएं तो फाइलों में कैद होकर रह गईं।
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क्षेत्र में महाविद्यालय की कमी की यह स्थिति तब है जबकि यहां स्थापित पीजी कॉलेज को ऑटोनामी मिलने के बाद वर्ष 2010-11 में भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने डिग्री कॉलेज की घोषणा की थी। लिहाजा स्थानीय व समीपवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा में दाखिला लेने के लिए डोईवाला, देहरादून, हरिद्वार आदि स्थानों पर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। त्रिवेणीघाट पर मोक्षदायिनी गंगा के दर्शन और नदी की जलधारा को घाट पर लाने की योजना भी वर्षों से लंबित है। इसका प्रस्ताव मॉडल स्टडी से आगे नहीं बढ़ सका। जबकि सूबे के मुख्यमंत्री रहे रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूड़ी के साथ ही विजय बहुगुणा भी गंगा की जलधारा को त्रिवेणी के मुख्यघाट तक लाने की घोषणा कर चुके हैं।
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ये योजनाएं भी हैं लंबित
-शहर को अतिक्रमण मुक्त किया जाना।
-हरिद्वार हाईवे पर रंभा नदी पर संजय झील का निर्माण।
-आस्थापथ को मुनिकीरेती से जोड़ने के लिए स्टील गार्डर ब्रिज निर्माण।
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ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में लंबित विकास योजनाओं को शुरू कराने और तेजी के साथ उन्हें पूरा कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्याओं के सामने आने व लंबित जरूरी योजनाओं पर तेजी से कार्य किए जा रहे हैं।
प्रेमचंद अग्रवाल, क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष