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-चिकित्साधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:42 AM IST
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चिकित्साधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
उत्तराखंड राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने चिकित्साधिकारी, क्षय रोग, रुगणालय, भवाली जिला नैनीताल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बाबत आयोग ने महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को चिकित्साधिकारी के दिसंबर और जनवरी के वेतन से जुर्माने की राशि वसूल कर प्रशासन के खाते में जमा कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विकासनगर निवासी भास्कर चुग ने तत्कालीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) विकासनगर और वर्तमान में क्षय रोग विभाग भवाली नैनीताल में तैनात डॉ. वीके ढौंढियाल के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर आयोग ने शिकायतकर्ता भास्कर चुग को नि:शुल्क अभिलेख निरीक्षण कराने के आदेश दिए थे, लेकिन डॉ. ढौंढियाल ने ऐसा नहीं किया। इस पर आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस के जवाब में डॉ. ढौंढियाल ने लिखा कि पदोन्नति पर वे प्रमुख अधीक्षक क्षय रोग के पद पर चले गए थे। इस कारण उनके लिए शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई करना संभव नहीं था। इस जवाब को अस्वीकार करते हुए आयोग ने डॉ. ढौंढियाल को सूचना की उपलब्धता में बांधा पहुंचाने का दोषी मानते हुए जुर्माना लगाया है।
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
उत्तराखंड राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने चिकित्साधिकारी, क्षय रोग, रुगणालय, भवाली जिला नैनीताल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बाबत आयोग ने महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को चिकित्साधिकारी के दिसंबर और जनवरी के वेतन से जुर्माने की राशि वसूल कर प्रशासन के खाते में जमा कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विकासनगर निवासी भास्कर चुग ने तत्कालीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) विकासनगर और वर्तमान में क्षय रोग विभाग भवाली नैनीताल में तैनात डॉ. वीके ढौंढियाल के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर आयोग ने शिकायतकर्ता भास्कर चुग को नि:शुल्क अभिलेख निरीक्षण कराने के आदेश दिए थे, लेकिन डॉ. ढौंढियाल ने ऐसा नहीं किया। इस पर आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस के जवाब में डॉ. ढौंढियाल ने लिखा कि पदोन्नति पर वे प्रमुख अधीक्षक क्षय रोग के पद पर चले गए थे। इस कारण उनके लिए शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई करना संभव नहीं था। इस जवाब को अस्वीकार करते हुए आयोग ने डॉ. ढौंढियाल को सूचना की उपलब्धता में बांधा पहुंचाने का दोषी मानते हुए जुर्माना लगाया है।
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