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पंजीकरण न कराने वाले अस्पताल होंगे सील
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पंजीकरण न कराने वाले अस्पताल होंगे सील
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की जगह उत्तराखंड हेल्थकेयर एक्ट की मांग को लेकर लामबंद नर्सिंगहोम और क्लीनिक संचालकों के प्रस्तावित आंदोलन से होने वाली परेशानी से जनता को बचाने के लिए सरकार, शासन व जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि एक माह के भीतर पंजीकरण नहीं कराने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों को सील करने की कार्रवाई शुरू की जाए।
जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित अफसरों से कहा कि नैदानिक स्थापन, पंजीकरण और विनियम अधिनियम 2010 व उत्तराखंड शासन की नियमावली 2015 के तहत जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण के अधिकारी आदेशों का कड़ाई से पालन कराएं।
डीएम ने उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन के संबंध में भी प्राधिकरण सदस्यों को व्यापक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए। जिन सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों ने अभी तक क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। उनको एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने का समय दिया जाए। एक माह के बाद पंजीकरण नहीं कराने अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों को ब्रांडेड दवाएं खरीदने के लिए दबाव न डाला जाए।
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जिले में अभी तक 307 अस्पताल ही पंजीकृत
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जिलाधिकारी को बताया कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत जिले में अभी तक 307 अस्पताल और क्लीनिक पंजीकृत हैं। पंजीकृत अस्पतालों में ऐलोपैथिक के 258 अस्पताल, आयुर्वेदिक के 44, होम्योपैथिक के महज दो अस्पताल व फिजियोथैरेपी पद्धति से इलाज करने वाले तीन अस्पताल शामिल हैं। बैठक में नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंड, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केके सिंह, आईएमए सदस्य डॉ. सुमन सेठी, डॉ. अजय खन्ना, डॉ. शरण दयाल समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
कोट...
अस्पताल संचालकों को एक माह का समय दिया गया है। एक माह के भीतर पंजीकरण नहीं कराने वाले अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए सील करने के आदेश जारी किए गए हैं। अदालत के आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की जगह उत्तराखंड हेल्थकेयर एक्ट की मांग को लेकर लामबंद नर्सिंगहोम और क्लीनिक संचालकों के प्रस्तावित आंदोलन से होने वाली परेशानी से जनता को बचाने के लिए सरकार, शासन व जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि एक माह के भीतर पंजीकरण नहीं कराने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों को सील करने की कार्रवाई शुरू की जाए।
जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित अफसरों से कहा कि नैदानिक स्थापन, पंजीकरण और विनियम अधिनियम 2010 व उत्तराखंड शासन की नियमावली 2015 के तहत जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण के अधिकारी आदेशों का कड़ाई से पालन कराएं।
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डीएम ने उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन के संबंध में भी प्राधिकरण सदस्यों को व्यापक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए। जिन सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों ने अभी तक क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। उनको एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने का समय दिया जाए। एक माह के बाद पंजीकरण नहीं कराने अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों को ब्रांडेड दवाएं खरीदने के लिए दबाव न डाला जाए।
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जिले में अभी तक 307 अस्पताल ही पंजीकृत
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जिलाधिकारी को बताया कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत जिले में अभी तक 307 अस्पताल और क्लीनिक पंजीकृत हैं। पंजीकृत अस्पतालों में ऐलोपैथिक के 258 अस्पताल, आयुर्वेदिक के 44, होम्योपैथिक के महज दो अस्पताल व फिजियोथैरेपी पद्धति से इलाज करने वाले तीन अस्पताल शामिल हैं। बैठक में नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंड, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केके सिंह, आईएमए सदस्य डॉ. सुमन सेठी, डॉ. अजय खन्ना, डॉ. शरण दयाल समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
कोट...
अस्पताल संचालकों को एक माह का समय दिया गया है। एक माह के भीतर पंजीकरण नहीं कराने वाले अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए सील करने के आदेश जारी किए गए हैं। अदालत के आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी