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दीक्षांत में आधी-अधूरी ड्रेस में दिखे छात्र
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
इक्फाई विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शनिवार को छात्र-छात्राएं आधी-अधूरी ड्रेस में दिखे। दीक्षांत समारोह में पहुंचे छात्रों ने अंग्रेजी गाउन तो नहीं पहना, लेकिन राज्य के अनुरूप पूरी ड्रेस भी नहीं पहनी। छात्र पैंट शर्ट के ऊपर गले में स्कॉर्फ डालकर पहुंचे थे और छात्राओं ने भी ऐसे ही परिधान पहन रखे थे। इस बाबत उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि कार्यकारी परिषद की बैठक में ड्रेस बदलाव का प्रस्ताव अभी पास नहीं पाया है।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने तय किया था कि दीक्षांत समारोह में पहने जाने वाला गाउन अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। इसलिए सरकार ने अपने राज्य की अलग ड्रेस बनाने की घोषणा की थी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डिजाइन विभाग ने दीक्षांत के लिए प्रदेश की अपनी ड्रेस तैयार की थी। इन परिधानों में गढ़वाल रेजीमेंट और कुमाऊं रेजीमेंट का रंग भरा गया है। यही ड्रेस ग्राफिक एरा हिल विवि ने सरकार के सामने रखी थी। इसमें टोपी का डिजाइन उत्तराखंड के परिपेक्ष्य में तैयार कराने, टोपी में राज्य पक्षी मोनाल व राज्य पुष्प ब्रह्मकमल करते हुए संशोधित परिधान का डिजाइन तैयार करने को कहा गया था। बहरहाल यह संशोधन आज तक नहीं हो पाया है। स्कूल ऑफ डिजाइन की एचओडी डॉ. ज्योति छाबड़ा का कहना है कि ड्रेस तैयार है, इसमें केवल संशोधन का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही सरकार से निर्देश मिलेंगे तो इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हालांकि अभी जो ड्रेस तैयार की गई है, उसमें भारतीय संस्कृति के साथ राज्य पुष्प ब्रह्मकमल, राज्य पक्षी मोनाल, गढ़वाल राइफल और कुमाऊं रेजीमेंट के ड्रेस के रंग को भी शामिल किया गया है।
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हमारी ड्रेस तैयार है। इक्फाई के दीक्षांत समारोह में छात्र पूरी ड्रेस इसलिए नहीं आए क्योंकि ड्रेस के बाबत कार्यकारी परिषद की बैठक में इस पर मुहर नहीं लग सकी है। जैसे ही परिषद में ड्रेस का यह प्रारूप पास हो जाएगा तो अगले वर्ष से छात्र पूरी यूनिफार्म दिखेंगे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी ड्रेस बदलने की पहल की सराहना की है। हमने मॉडल ड्रेस तैयार की है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों को फॉलो करना है।
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-डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री
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इक्फाई विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शनिवार को छात्र-छात्राएं आधी-अधूरी ड्रेस में दिखे। दीक्षांत समारोह में पहुंचे छात्रों ने अंग्रेजी गाउन तो नहीं पहना, लेकिन राज्य के अनुरूप पूरी ड्रेस भी नहीं पहनी। छात्र पैंट शर्ट के ऊपर गले में स्कॉर्फ डालकर पहुंचे थे और छात्राओं ने भी ऐसे ही परिधान पहन रखे थे। इस बाबत उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि कार्यकारी परिषद की बैठक में ड्रेस बदलाव का प्रस्ताव अभी पास नहीं पाया है।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने तय किया था कि दीक्षांत समारोह में पहने जाने वाला गाउन अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। इसलिए सरकार ने अपने राज्य की अलग ड्रेस बनाने की घोषणा की थी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डिजाइन विभाग ने दीक्षांत के लिए प्रदेश की अपनी ड्रेस तैयार की थी। इन परिधानों में गढ़वाल रेजीमेंट और कुमाऊं रेजीमेंट का रंग भरा गया है। यही ड्रेस ग्राफिक एरा हिल विवि ने सरकार के सामने रखी थी। इसमें टोपी का डिजाइन उत्तराखंड के परिपेक्ष्य में तैयार कराने, टोपी में राज्य पक्षी मोनाल व राज्य पुष्प ब्रह्मकमल करते हुए संशोधित परिधान का डिजाइन तैयार करने को कहा गया था। बहरहाल यह संशोधन आज तक नहीं हो पाया है। स्कूल ऑफ डिजाइन की एचओडी डॉ. ज्योति छाबड़ा का कहना है कि ड्रेस तैयार है, इसमें केवल संशोधन का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही सरकार से निर्देश मिलेंगे तो इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हालांकि अभी जो ड्रेस तैयार की गई है, उसमें भारतीय संस्कृति के साथ राज्य पुष्प ब्रह्मकमल, राज्य पक्षी मोनाल, गढ़वाल राइफल और कुमाऊं रेजीमेंट के ड्रेस के रंग को भी शामिल किया गया है।
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हमारी ड्रेस तैयार है। इक्फाई के दीक्षांत समारोह में छात्र पूरी ड्रेस इसलिए नहीं आए क्योंकि ड्रेस के बाबत कार्यकारी परिषद की बैठक में इस पर मुहर नहीं लग सकी है। जैसे ही परिषद में ड्रेस का यह प्रारूप पास हो जाएगा तो अगले वर्ष से छात्र पूरी यूनिफार्म दिखेंगे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी ड्रेस बदलने की पहल की सराहना की है। हमने मॉडल ड्रेस तैयार की है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों को फॉलो करना है।
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-डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री