फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   राज्यगीत चुना, बजा और फिर ‘गुम’ हो गया

राज्यगीत चुना, बजा और फिर ‘गुम’ हो गया

Thu, 22 Feb 2018 01:48 AM IST
Updated Thu, 22 Feb 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
राज्यगीत चुना, बजा और फिर ‘गुम’ हो गया
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विज्ञापन

पूर्व सरकार के कार्यकाल में उत्तराखंड राज्य के लिए घोषित किए गए राज्यगीत एक बार स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर बजने के बाद ‘गुम’ हो गया है। इस मामले में संस्कृति विभाग और राज्यगीत चयन कमेटी नई सरकार का पक्ष न आने का हवाला दे रहे हैं। वहीं राज्यगीत के रचयिता हेमंत बिष्ट भी चयन के बाद गीत के ‘गुम’ होने पर हतप्रभ हैं।
उत्तराखंड राज्य के अपने गीत के लिए तत्कालीन हरीश रावत की सरकार ने फरवरी 2016 के प्रथम सप्ताह में एक सार्वजनिक सभा में राज्यगीत की घोषणा की थी। इसके बाद 4 मार्च को राज्यपाल की ओर से भी सहमति मिल गई। पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 15 अगस्त के मौके पर गीत बजाया भी गया, लेकिन नई सरकार के आने के बाद से राज्य गीत नहीं बजा।
विज्ञापन

बता दें तत्कालीन हरीश रावत की सरकार ने राज्य गीत को लेकर बेहद जोर दिया था। सरकार ने संस्कृति विभाग को राज्यगीत चयन का काम सौंपा था। इसके बाद संस्कृति विभाग ने गीत के चयन के लिए कमेटी बनाई और विज्ञापन के माध्यम से देशभर से प्रविष्टियां मांगीं। करीब 13 लोगों की कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बटरोही और उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी थे। कमेटी को 203 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। इनमें से कुमाऊं के हेमंत बिष्ट का गीत चुना गया। इस दौरान बिष्ट से गीत में कुछ संशोधन कराए गए। इसके बाद कमेटी ने गीत की धुन तैयार करने की जिम्मेदारी लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को दी। नेगी ने दिल्ली के एक स्टूडियो में गीत कंपोज कर तैयार किया। इसके बाद गीत सरकार को सौंप दिया गया। कैबिनेट की सहमति के बाद हेमंत बिष्ट के गीत को राज्यगीत का दर्जा मिला, लेकिन 15 अगस्त के मौके पर गीत बजने के बाद ‘गुम’ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
हमारी कमेटी ने राज्यगीत चुन लिया था। इसे बेहद कवायद के बाद पूरी तरह से तैयार भी कर लिया गया था। इसके बावजूद गीत किसी अवसर पर सुनाई नहीं दे रहा है। गीत किस लाइब्रेरी में है, नहीं पता। इस बारे में नई सरकार की क्या मंशा है, हम कुछ नहीं कह सकते हैं।

-नरेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष, चयन कमेटी राज्यगीत
---
संस्कृति विभाग की ओर से कमेटी गठित कर गीत का चयन करा लिया गया था। गीत को कैबिनेट में भी रखा गया था। इस संबंध में नई सरकार से नए सिरे से कोई बातचीत नहीं हुई है। इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता है।
-बीना भट्ट, निदेशक, संस्कृति विभाग

------------------
राज्यगीत की कुछ पंक्तियां
उत्तराखंड देवभूमि मातृ भूमि, शत-शत वंदन अभिनंदन
दर्शन संस्कृति धर्म साधना क्षम रंजित तेरा कण-कण, अभिनंदन-अभिनंदन
गंगा यमुना तेरा आंचल, दिव्य हिमालय तेरा शीष
सब धर्मों की छाया तुझ पर, चारधाम देते आशीष
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed