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Dehradun News: जर्जर पुल पर जोखिम भरा सफर, ढहने की आशंका
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I-शक्ति नहर पर डाकपत्थर से कुल्हाल तक बने 12 पुल जर्जर
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I- 25 हजार की आबादी करती है पुलों से आवागमनI
शक्ति नहर पर डाकपत्थर से कुल्हाल तक बने 12 पुल बेहद जर्जर हो चुके हैं। पिछले साल दिसंबर में उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने पुलों का सेफ्टी ऑडिट करवाया था, लेकिन करीब एक साल बाद भी ऑडिट रिपोर्ट नहीं मिली है। पुलों पर बिना रोके-टोक धड़ल्ले से खनन समाग्री से भरे वाहन फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में पुलों के ढहने से बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। शक्तिनहर के आसपास रहने वाली करीब 25 हजार की आबादी इन पुलों से आवाजाही करती है।
वर्ष 1960 से 1965 के बीच अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय शक्तिनहर पर सिंचाई विभाग डाकपत्थर से कुल्हाल तक छोटे बड़े 12 पुल का निर्माण किया गया। इन पुल के माध्यम से ही नहर के एक छोर से दूसरे छोर तक स्थानीय ग्रामीण आवागमन करते हैं। यह सभी पुल अपनी मियाद पूरी कर चुके है। पुल के निर्माण के बाद से ही खनन सामग्री से भरे भारी वाहन इन पुलों से लगातार आवाजाही करते रहे हैं। अब पुल जर्जरता की सीमा पार कर गया है।
पुल से रोजाना हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण गुजरते हैं। इनमें बड़ी स्कूलों और कॉलेजों के छात्र भी शामिल होते हैं। अगर कभी जर्जर पुल ढहता है तो बड़ा हादसा हो सकता है। नीचे नहर बहती है। ऐसे में अचानक रेस्क्यू अभियान शुरू करना मुश्किल होगा। साल 2022 के दिसंबर माह में यूजेवीएनएल ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान से पुलों का सेफ्टी ऑडिट करवाया था। अभी सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट आनी है। सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट से पता चलेगा कि पुल आवागमन के लिए उपयुक्त हैं यहां नहीं। रिपोर्ट आने के बाद ही पुलों की मरम्मत या उनको तोड़कर नए पुलों का निर्माण करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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I21 किलोमीटर लंबा मार्ग, 18 गांवI
शक्ति नहर की लंबाई डाकपत्थर से कुल्हाल तक 21 किलोमीटर है। नहर के दाेनों ओर 25 हजार की आबादी रहती है। डाकपत्थर, नवाबगढ़, भीमावाला, अजीतनगर, हरिपुर, ढालीपुर, मटक माजरी, कुंजा, कुल्हाले सहित 18 से अधिक गांव के लोग शक्तिनहर पर बने पुलों से रोज गुजरते हैं।
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Iशक्तिनहर पर बने अधिकांश पुल जर्जर हो चुके है। पुलों से रोज आवागमन करना मजबूरी है। डर लगा रहता है कि कहीं पुल टूट न जाए। पुलों की मरम्मत जल्द से जल्द होनी चाहिए।
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Iविनय कुमार, स्थानीय निवासी
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Iयहां नहर को पार करने के लिए पुल ही सहारा है। नौकरीपेशा के काम और बच्चों ने स्कूल जाना होता है। अगर पुल पार नहीं करेंगे तो आवागमन कैसे होगा। पुलों की स्थिति इतनी खराब है आवागमन में डर लगता है। पुल की मरम्मत या नए पुल का निर्माण होना ही चाहिए।
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Iरेखा देवी, प्रधान, भीमावाला
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Iबड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पुलों से आवागमन करती हैं। पुल जर्जर हो चुके है। अगर पुल टूटते है तो दुर्घटना हो सकती है। जनहित में पुलों की मरम्मत या नए का निर्माण करना बहुत जरूरी है।
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Iलक्ष्मी वर्मा, अध्यक्ष, छात्र संघ, वीर शहीद केसरी चंद स्नातकोत्तर महाविद्यालयI
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I- 25 हजार की आबादी करती है पुलों से आवागमनI
शक्ति नहर पर डाकपत्थर से कुल्हाल तक बने 12 पुल बेहद जर्जर हो चुके हैं। पिछले साल दिसंबर में उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने पुलों का सेफ्टी ऑडिट करवाया था, लेकिन करीब एक साल बाद भी ऑडिट रिपोर्ट नहीं मिली है। पुलों पर बिना रोके-टोक धड़ल्ले से खनन समाग्री से भरे वाहन फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में पुलों के ढहने से बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। शक्तिनहर के आसपास रहने वाली करीब 25 हजार की आबादी इन पुलों से आवाजाही करती है।
वर्ष 1960 से 1965 के बीच अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय शक्तिनहर पर सिंचाई विभाग डाकपत्थर से कुल्हाल तक छोटे बड़े 12 पुल का निर्माण किया गया। इन पुल के माध्यम से ही नहर के एक छोर से दूसरे छोर तक स्थानीय ग्रामीण आवागमन करते हैं। यह सभी पुल अपनी मियाद पूरी कर चुके है। पुल के निर्माण के बाद से ही खनन सामग्री से भरे भारी वाहन इन पुलों से लगातार आवाजाही करते रहे हैं। अब पुल जर्जरता की सीमा पार कर गया है।
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पुल से रोजाना हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण गुजरते हैं। इनमें बड़ी स्कूलों और कॉलेजों के छात्र भी शामिल होते हैं। अगर कभी जर्जर पुल ढहता है तो बड़ा हादसा हो सकता है। नीचे नहर बहती है। ऐसे में अचानक रेस्क्यू अभियान शुरू करना मुश्किल होगा। साल 2022 के दिसंबर माह में यूजेवीएनएल ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान से पुलों का सेफ्टी ऑडिट करवाया था। अभी सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट आनी है। सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट से पता चलेगा कि पुल आवागमन के लिए उपयुक्त हैं यहां नहीं। रिपोर्ट आने के बाद ही पुलों की मरम्मत या उनको तोड़कर नए पुलों का निर्माण करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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I21 किलोमीटर लंबा मार्ग, 18 गांवI
शक्ति नहर की लंबाई डाकपत्थर से कुल्हाल तक 21 किलोमीटर है। नहर के दाेनों ओर 25 हजार की आबादी रहती है। डाकपत्थर, नवाबगढ़, भीमावाला, अजीतनगर, हरिपुर, ढालीपुर, मटक माजरी, कुंजा, कुल्हाले सहित 18 से अधिक गांव के लोग शक्तिनहर पर बने पुलों से रोज गुजरते हैं।
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Iशक्तिनहर पर बने अधिकांश पुल जर्जर हो चुके है। पुलों से रोज आवागमन करना मजबूरी है। डर लगा रहता है कि कहीं पुल टूट न जाए। पुलों की मरम्मत जल्द से जल्द होनी चाहिए।
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Iविनय कुमार, स्थानीय निवासी
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Iयहां नहर को पार करने के लिए पुल ही सहारा है। नौकरीपेशा के काम और बच्चों ने स्कूल जाना होता है। अगर पुल पार नहीं करेंगे तो आवागमन कैसे होगा। पुलों की स्थिति इतनी खराब है आवागमन में डर लगता है। पुल की मरम्मत या नए पुल का निर्माण होना ही चाहिए।
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Iरेखा देवी, प्रधान, भीमावाला
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Iबड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पुलों से आवागमन करती हैं। पुल जर्जर हो चुके है। अगर पुल टूटते है तो दुर्घटना हो सकती है। जनहित में पुलों की मरम्मत या नए का निर्माण करना बहुत जरूरी है।
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Iलक्ष्मी वर्मा, अध्यक्ष, छात्र संघ, वीर शहीद केसरी चंद स्नातकोत्तर महाविद्यालयI