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एलोपैथिक दवाओं के इस्तेमाल का मिले अधिकार
Updated Mon, 05 Nov 2018 01:03 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
धन्वंतरि जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), आरोग्य भारती, विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज के तत्वावधान में तृतीय आयुर्वेद दिवस का आयोजन स्थानीय होटल किया गया। इस दौरान आयुर्वेद डॉक्टरों ने ड्रग एक्ट में संशोधन कर एलोपैथिक दवाओं के उपयोग का अधिकार देने की मांग रखी। इसके अलावा आयुर्वेद से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की गई।
आयुर्वेद दिवस के दौरान नीमा, आरोग्य भारती व विश्व आयुर्वेद परिषद से जुड़े डॉक्टरों ने मांग उठायी कि चिकित्सा की तमाम पैथी से जुड़े डॉक्टरों को इंटर डिसिप्लीनरी रेफरल सिस्टम के तहत एक दूसरे की पैथी का सम्मान करते हुए एक दूसरे की चिकित्सा पैथी के बारे में भी अवगत कराया जाए। इसके साथ ही देश में जड़ी बूटियों की जानकारी बढ़ाए जाने के उद्देश्य से घर आंगन, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों में उपलब्ध जमीनों पर औषधीय पौधों की वाटिका स्थापित की जाए। आयुर्वेदिक दवाओं की फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए मानकों का सरलीकरण के साथ ही लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाय। जड़ी बूटी उत्पादकों के लिए खेती व विपणन की स्पष्ट नीति बनायी जाए। इसके अलावा आयुर्वेद के सिद्धांतोें मसलन ऋतुचर्या, आहार विहार, दिन चर्या योग को प्राथमिक स्तर पर ही शिक्षा से जोड़ा जाए।
इस मौके पर मुख्य अतिथि आयुष शिक्षा एवं वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है। इसको बढ़ावा देने के लिए सरकार के स्तर पर हर संभव कदम उठाए गए हैं। कार्यक्रम में आरएसएस के क्षेत्र कार्यवाह शशिकांत दीक्षित, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार, निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, डॉ. एस फारुख समेत कई वक्ताओें ने संबोधित किया। इस मौके पर नीमा के प्रदेश महामंत्री डॉ. मुकेश धबलानिया, देहरादून अध्यक्ष डॉ.ॅ अरविंद चौधरी, आरोग्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विनोद मित्तल, सचिव डॉ. अखिलेश भटनागर, डॉ. ओमप्रकाश जोशी, विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यतेंद्र सिंह मलिक, उपाध्यक्ष वैद्य विनीष गुप्ता, डॉ. शिवम वैद्य, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अश्वनी कांबोज, प्राचार्य डॉ. सत्यमानव दयाल, निदेशक सुमित कुमार, डॉ. आदित्य आर्य, डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह, डॉ. डीके जैन, डॉ. इकबाल ग्रेवाल, डॉ. ओमप्रकाश जोशी आदि शामिल रहे।
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धन्वंतरि जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), आरोग्य भारती, विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज के तत्वावधान में तृतीय आयुर्वेद दिवस का आयोजन स्थानीय होटल किया गया। इस दौरान आयुर्वेद डॉक्टरों ने ड्रग एक्ट में संशोधन कर एलोपैथिक दवाओं के उपयोग का अधिकार देने की मांग रखी। इसके अलावा आयुर्वेद से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की गई।
आयुर्वेद दिवस के दौरान नीमा, आरोग्य भारती व विश्व आयुर्वेद परिषद से जुड़े डॉक्टरों ने मांग उठायी कि चिकित्सा की तमाम पैथी से जुड़े डॉक्टरों को इंटर डिसिप्लीनरी रेफरल सिस्टम के तहत एक दूसरे की पैथी का सम्मान करते हुए एक दूसरे की चिकित्सा पैथी के बारे में भी अवगत कराया जाए। इसके साथ ही देश में जड़ी बूटियों की जानकारी बढ़ाए जाने के उद्देश्य से घर आंगन, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों में उपलब्ध जमीनों पर औषधीय पौधों की वाटिका स्थापित की जाए। आयुर्वेदिक दवाओं की फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए मानकों का सरलीकरण के साथ ही लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाय। जड़ी बूटी उत्पादकों के लिए खेती व विपणन की स्पष्ट नीति बनायी जाए। इसके अलावा आयुर्वेद के सिद्धांतोें मसलन ऋतुचर्या, आहार विहार, दिन चर्या योग को प्राथमिक स्तर पर ही शिक्षा से जोड़ा जाए।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि आयुष शिक्षा एवं वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है। इसको बढ़ावा देने के लिए सरकार के स्तर पर हर संभव कदम उठाए गए हैं। कार्यक्रम में आरएसएस के क्षेत्र कार्यवाह शशिकांत दीक्षित, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार, निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, डॉ. एस फारुख समेत कई वक्ताओें ने संबोधित किया। इस मौके पर नीमा के प्रदेश महामंत्री डॉ. मुकेश धबलानिया, देहरादून अध्यक्ष डॉ.ॅ अरविंद चौधरी, आरोग्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विनोद मित्तल, सचिव डॉ. अखिलेश भटनागर, डॉ. ओमप्रकाश जोशी, विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यतेंद्र सिंह मलिक, उपाध्यक्ष वैद्य विनीष गुप्ता, डॉ. शिवम वैद्य, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अश्वनी कांबोज, प्राचार्य डॉ. सत्यमानव दयाल, निदेशक सुमित कुमार, डॉ. आदित्य आर्य, डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह, डॉ. डीके जैन, डॉ. इकबाल ग्रेवाल, डॉ. ओमप्रकाश जोशी आदि शामिल रहे।
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