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आय प्रमाण-पत्र चाहिए तो ये फॉर्म भरना जरूरी
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। जिन लोगों ने आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर दिया है वह इस मुगालते में न रहें कि लेखपालों का कार्य बहिष्कार समाप्त होने के बाद उनका प्रमाणपत्र बनकर घर पहुंच जाएगा। शासन ने फार्म का नया प्रारूप जारी कर दिया है। इसे भरना अब जरूरी है। आवेदक तहसील पहुंचकर संबंधित लेखपाल को अपनी आय के स्त्रोत बताएंगे। जांच के बाद आय प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
दरअसल, समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया है। लोगों ने फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाकर छात्रवृत्ति हासिल कर ली। इस मामले में एसआईटी ने तहसील से आय प्रमाणपत्रों का ब्योरा तलब किया। जिसके विरोध में चार फरवरी से देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और चंपावत जिलों के लेखपाल कार्य बहिष्कार पर चले गए। इस दौरान लेखपालों ने शासन से उत्तरप्रदेश की तर्ज पर आय प्रमाणपत्र बनाने के मानक निर्धारित करने की मांग की थी। कार्य बहिष्कार के चलते पांच जिलों में तीन माह में दस हजार आय प्रमाणपत्र और 12 हजार दाखिल खारिज का कार्य लटक गया। लोगों की परेशानी को देखते हुए सात मई को शासन ने लेखपालों की मांग मान ली और प्रमाणपत्र बनाने का नया प्रारूप जारी कर दिया। उसके बाद लेखपालों ने कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया। उसके बाद से अब प्रमाणपत्र बनने लगे हैं। अब स्थिति ये है कि शासन की ओर से जारी नये प्रारूप के बाद दस हजार आवेदनकर्ताओं को दोबारा तहसील आना होगा। आवेदनकर्ता वहां आकर पहले अपनी आय के स्त्रोत बताएंगे तब जांच कर लेखपाल उन्हें आय प्रमाणपत्र जारी करेगा।
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देहरादून। जिन लोगों ने आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर दिया है वह इस मुगालते में न रहें कि लेखपालों का कार्य बहिष्कार समाप्त होने के बाद उनका प्रमाणपत्र बनकर घर पहुंच जाएगा। शासन ने फार्म का नया प्रारूप जारी कर दिया है। इसे भरना अब जरूरी है। आवेदक तहसील पहुंचकर संबंधित लेखपाल को अपनी आय के स्त्रोत बताएंगे। जांच के बाद आय प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
दरअसल, समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया है। लोगों ने फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाकर छात्रवृत्ति हासिल कर ली। इस मामले में एसआईटी ने तहसील से आय प्रमाणपत्रों का ब्योरा तलब किया। जिसके विरोध में चार फरवरी से देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और चंपावत जिलों के लेखपाल कार्य बहिष्कार पर चले गए। इस दौरान लेखपालों ने शासन से उत्तरप्रदेश की तर्ज पर आय प्रमाणपत्र बनाने के मानक निर्धारित करने की मांग की थी। कार्य बहिष्कार के चलते पांच जिलों में तीन माह में दस हजार आय प्रमाणपत्र और 12 हजार दाखिल खारिज का कार्य लटक गया। लोगों की परेशानी को देखते हुए सात मई को शासन ने लेखपालों की मांग मान ली और प्रमाणपत्र बनाने का नया प्रारूप जारी कर दिया। उसके बाद लेखपालों ने कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया। उसके बाद से अब प्रमाणपत्र बनने लगे हैं। अब स्थिति ये है कि शासन की ओर से जारी नये प्रारूप के बाद दस हजार आवेदनकर्ताओं को दोबारा तहसील आना होगा। आवेदनकर्ता वहां आकर पहले अपनी आय के स्त्रोत बताएंगे तब जांच कर लेखपाल उन्हें आय प्रमाणपत्र जारी करेगा।
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