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दिव्यांगों ने युवाओं से ड्रग्स से दूर रहने का किया आह्वान
Updated Mon, 03 Dec 2018 02:07 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
नशे के विरोध में रविवार को पुलिस की ओर से आयोजित हॉफ मैराथन में दिव्यांगों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान दिव्यांगों ने युवाओं को ड्रग्स से दूर रहने की नसीहत दी।
पुलिस लाइन में रविवार को आयोजित 10 किलोमीटर मैराथन दौड़ में प्रतिभाग कर वापस लौटे दिव्यांगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। दिव्यांगों ने कहा कि ड्रग्स की लत जीवनभर पीछा नहीं छोड़ती। नशा इंसान को मेरे जैसा अपाहिज बना देता है।
ऋषिकेश निवासी और पैरा बैडमिंटन की राष्ट्रीय खिलाड़ी नीरजा गोयल (37) ने कहा कि नशे के खिलाफ मुहिम में वे उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे भारत के साथ हैं। लक्सर से पहुंचे दिग्विजय सिंह का कहना है कि देश के युवाओं को नशे की लत के बचाने की जरूरत है। ड्रग्स के नशे से युवा अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं। इससे वे जीवन की सही राह से भटक जाते हैं। नशा समाज के लिए बहुत घातक है और यह शरीर के साथ-साथ आर्थिक हानि भी करता है। दिल्ली निवासी गुड्डू पंवार ने बताया कि नशे की वजह से समाज में कई कुरीतियां और बीमारियों भी फैल रही हैं। अक्सर नशे की लत के शिकार युवा जुर्म की दुनिया में पहुंच जाते हैं।
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मैराथन में दौड़े आश्रम के बच्चे
ऋषिकेश स्थित स्वामी दयानंद आश्रम के बच्चों ने भी मैराथन में प्रतिभाग किया। बच्चों ने नशे के खिलाफ 10 किमी दौड़ लगाने के बाद नशा न करने की शपथ ली। दौड़ में विजय सिंह, विपिन, अजय पंवार, दिनेश व अन्य मौजूद रहे।
मैराथन में उत्साहित दिखे युवा
छात्रों ने कहा : बचाना होगा भविष्य, सेल्फी लेकर कैद कीं यादें
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। एक ओर जहां विदेशी युवा ड्रग्स के खिलाफ दौड़ लगाकर सबसे ज्यादा राशि जीतने में सफल रहे। वहीं, दूसरी ओर स्कूली बच्चों ने भी इस मुहिम में हिस्सा लेकर भरपूर उत्साह दिखाया। विदेशी धावकों के साथ विभिन्न स्कूलों के छात्र शहर के कई मार्गों से होते हुए अंत में पुलिस लाइन में दौड़ समाप्त की। इसके बाद युवाओं ने सेल्फी लेकर दौड़ से जुड़ी यादें कैद कीं। सेंट मैरी स्कूल में पढ़ने वाली दसवीं की छात्रा खुशी सेमवाल ने कहा था कि दौड़ का मकसद सिर्फ मैराथन में जीतना नहीं था। हमें गर्व है कि हम नशे के खिलाफ मैराथन का हिस्सा बने। विवेक जोशी ने बताया कि इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। इस दौरान विदेशी धावकों से काफी कुछ सीखने को मिला।
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नशे के विरोध में रविवार को पुलिस की ओर से आयोजित हॉफ मैराथन में दिव्यांगों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान दिव्यांगों ने युवाओं को ड्रग्स से दूर रहने की नसीहत दी।
पुलिस लाइन में रविवार को आयोजित 10 किलोमीटर मैराथन दौड़ में प्रतिभाग कर वापस लौटे दिव्यांगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। दिव्यांगों ने कहा कि ड्रग्स की लत जीवनभर पीछा नहीं छोड़ती। नशा इंसान को मेरे जैसा अपाहिज बना देता है।
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ऋषिकेश निवासी और पैरा बैडमिंटन की राष्ट्रीय खिलाड़ी नीरजा गोयल (37) ने कहा कि नशे के खिलाफ मुहिम में वे उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे भारत के साथ हैं। लक्सर से पहुंचे दिग्विजय सिंह का कहना है कि देश के युवाओं को नशे की लत के बचाने की जरूरत है। ड्रग्स के नशे से युवा अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं। इससे वे जीवन की सही राह से भटक जाते हैं। नशा समाज के लिए बहुत घातक है और यह शरीर के साथ-साथ आर्थिक हानि भी करता है। दिल्ली निवासी गुड्डू पंवार ने बताया कि नशे की वजह से समाज में कई कुरीतियां और बीमारियों भी फैल रही हैं। अक्सर नशे की लत के शिकार युवा जुर्म की दुनिया में पहुंच जाते हैं।
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मैराथन में दौड़े आश्रम के बच्चे
ऋषिकेश स्थित स्वामी दयानंद आश्रम के बच्चों ने भी मैराथन में प्रतिभाग किया। बच्चों ने नशे के खिलाफ 10 किमी दौड़ लगाने के बाद नशा न करने की शपथ ली। दौड़ में विजय सिंह, विपिन, अजय पंवार, दिनेश व अन्य मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। एक ओर जहां विदेशी युवा ड्रग्स के खिलाफ दौड़ लगाकर सबसे ज्यादा राशि जीतने में सफल रहे। वहीं, दूसरी ओर स्कूली बच्चों ने भी इस मुहिम में हिस्सा लेकर भरपूर उत्साह दिखाया। विदेशी धावकों के साथ विभिन्न स्कूलों के छात्र शहर के कई मार्गों से होते हुए अंत में पुलिस लाइन में दौड़ समाप्त की। इसके बाद युवाओं ने सेल्फी लेकर दौड़ से जुड़ी यादें कैद कीं। सेंट मैरी स्कूल में पढ़ने वाली दसवीं की छात्रा खुशी सेमवाल ने कहा था कि दौड़ का मकसद सिर्फ मैराथन में जीतना नहीं था। हमें गर्व है कि हम नशे के खिलाफ मैराथन का हिस्सा बने। विवेक जोशी ने बताया कि इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। इस दौरान विदेशी धावकों से काफी कुछ सीखने को मिला।