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विश्वास रखने वाले भक्तों के साथ रहते हैं भगवान
Updated Thu, 14 Jun 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मच्छी बाजार स्थित कालिका मंदिर में भक्तमाल कथा का बुधवार को समापन हो गया। समापन के मौके पर भागवताचार्य देवेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने मीरा के जीवन पर आधारित भक्ति कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि हमें कर्म करते रहना चाहिए, फल देने का काम भगवान का है। भगवान पर विश्वास रखने वाले भक्तों का साथ भगवान कभी नहीं छोड़ता। इसलिए नि:स्वार्थ भाव से की गई पूजा से भगवान जरूर प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि मीरा के जीवन में भी अनेक प्रकार के दुख आए, लेकिन वह कभी भी दुखों से घबराई नहीं। हमेशा अपने गिरधर गोपाल का स्मरण करती रही। मीरा के दृढ़ विश्वास को देखकर गोपाल हमेशा उनकी संकट में रक्षा करते थे। उन्होंने कहा कि सती, सूपर्णनखा और शबरी ये तीन महिलाएं थी। जिन्होंने प्रभु श्रीराम के अलग-अलग रूपों में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि भक्त को भगवान व अपनी भक्ती पर विश्वास होना चाहिए। भगवान कहीं अपने भक्त को निराश नहीं करते। इसके बाद कथावाचक ने महराजा अंबरीश की भक्ति कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान राजा की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए महर्षि दुर्वासा को भेजा, जिसमें राजा अंबरीश खरे उतरे। कथा के दौरान अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मच्छी बाजार स्थित कालिका मंदिर में भक्तमाल कथा का बुधवार को समापन हो गया। समापन के मौके पर भागवताचार्य देवेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने मीरा के जीवन पर आधारित भक्ति कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि हमें कर्म करते रहना चाहिए, फल देने का काम भगवान का है। भगवान पर विश्वास रखने वाले भक्तों का साथ भगवान कभी नहीं छोड़ता। इसलिए नि:स्वार्थ भाव से की गई पूजा से भगवान जरूर प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि मीरा के जीवन में भी अनेक प्रकार के दुख आए, लेकिन वह कभी भी दुखों से घबराई नहीं। हमेशा अपने गिरधर गोपाल का स्मरण करती रही। मीरा के दृढ़ विश्वास को देखकर गोपाल हमेशा उनकी संकट में रक्षा करते थे। उन्होंने कहा कि सती, सूपर्णनखा और शबरी ये तीन महिलाएं थी। जिन्होंने प्रभु श्रीराम के अलग-अलग रूपों में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि भक्त को भगवान व अपनी भक्ती पर विश्वास होना चाहिए। भगवान कहीं अपने भक्त को निराश नहीं करते। इसके बाद कथावाचक ने महराजा अंबरीश की भक्ति कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान राजा की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए महर्षि दुर्वासा को भेजा, जिसमें राजा अंबरीश खरे उतरे। कथा के दौरान अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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