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देखते ही देखते तबाह हो गया परिवार
देवेंद्र बर्त्वाल
Updated Thu, 11 Jul 2013 11:22 AM IST
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सज्जन के मुंहबोले भाई रणजीत ने बताया कि मंगलवार मध्य रात्रि को जब बारिश तेज होने लगी तो ग्रामीणों को किसी अनहोनी का अंदेशा होने लगा था। उन्होंने सज्जन को कहा, बारिश बढ़ती जा रही है, इधर-उधर चलो, लेकिन वे अपने घरों में ही दुबके रहे।
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ठीक तीन बजे बिजली चले गई। अंधेरा होने पर सज्जन परिवार सहित कमरे में चले गया, लेकिन पल भर में मकान ढह गया। जमीदोज हुए मकान के एक कोने में बैठे रणजीत लाल ने बताया कि भरापूरा परिवार देखते ही देखते तबाह हो गया। सज्जन और उसका बेटा संजय मेहनत, मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
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इन दिनों सज्जन अपने छोटे बेटे विजय लाल की शादी की तैयारी में था। विजय देहरादून में प्राइवेट नौकरी करता है, लेकिन विश्वास ही नहीं हो रहा है कि यह परिवार ऐसे काल के ग्रास में समा जाएगा। उन्होंने बताया कि सज्जन की दो वर्षीय पौत्री सृष्टि और चार वर्षीय कामिनी दादा के डांटने पर मेरे पास शिकायत करने आ जाती थी, लेकिन हमें छोड़कर ये बच्चियां कहां चली गई हैं।
मनसूबे पूरे नहीं हुए
सज्जन ने उम्रभर परिवार के भरण-पोषण के लिए मेहनत, मजदूरी की। जब संजय की तीसरी पुत्री हुई, तो सज्जन लाल ने कहा कि बेटा हो या बेटी, क्या फर्क पड़ता है। ये बेटियां हमारे बुढ़ापे का सहारा होंगी, लेकिन सज्जन को क्या मालूम था कि काल उसके मनसूबे पूरे होने नहीं देगा।
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