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आपदा के बाद अब आगे क्या होगा?
श्रीनगर/राजीव खत्री
Updated Wed, 19 Jun 2013 04:41 PM IST
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आपदा में अपना सब कुछ गवां चुके पीड़ित अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। बाढ़ में अपने जीवन भर की पूंजी गंवा चुके ये पीड़ित परिवार जीवन को फिर कैसे शुरू करे इसे लेकर परेशान हैं। बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन के रवैये को देखकर नहीं लगता कि प्रशासन से इन्हें कोई आर्थिक सहायता मिल पाएगी।
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किसी ने पाई-पाई जोड़कर तो किसी ने जीवन भी की कमाई लगाकर अपने सपनों का आशियाना खड़ा किया था। हंसी-खुशी अपना जीवन जी रहे इन लोगों के लिए 15 जून की रात किसी काले सपने से कम नहीं थी। अलकनंदा के अचानक बढ़े जलस्तर ने किसी को कुछ सोचने का मौका ही नहीं दिया।
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गहने, नगदी, जरूरी कागजात आदि सामान छोड़ लोग किसी तरह जान बचाकर अपने घरों से भागे। सोमवार सुबह जब नजारा देखा तो आंखों के सामने अंधेरा छा गया। सब कुछ अलकनंदा में समा चुका था। चारों तरफ पानी था। प्रशासन से मदद की कुछ आस थी, लेकिन वो भी तब काफूर हो गई जब प्रशासन ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को मात्र 2700 रुपए पकड़ा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
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मैने अपने जीवन भर की पूंजी लगाकर मकान बनाया था, लेकिन आज पूरा मकान दलदल में धंसा हुआ है। एक जोड़ी कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा। अब आगे क्या होगा कुछ समझ में नहीं आ रहा।
- सुरेंद्र सिंह भंडारी, लोअर भक्तियाना
हमारे पास कुछ नहीं बचा कपड़े भी मांग कर पहने हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए, बस हमें एक छत दे दें जहां हम अपने बच्चों के साथ सुरक्षित रह सकें।
- विजय लक्ष्मी कोटनाला, शक्तिविहार
क्षति के मूल्यांकन के लिए पांच टीमें बनाई गई है। मुआवजे की बात मूल्यांकन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
- कुश्म चौहान तहसीलदार, श्रीनगर