{"_id":"502a18c0-dfac-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"destruction-in-kedarnath-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"...दादा ने किया पोते का क्रियाकर्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...दादा ने किया पोते का क्रियाकर्म
पुरूषोत्तम असनोड़ा
Updated Fri, 28 Jun 2013 10:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किवदंतियां है कि पोते के कांधे पर दादा की अर्थी जाए तो उस पर मातम नहीं होता। लेकिन ब्लाक के सारकोट पर प्रकृति ने ऐसा कहर बरपाया कि यहां दादा को पोते का क्रियाकर्म करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
नौकरी के लिए केदारनाथ गए सारकोट गांव के सात युवक आपदा में जान गंवा बैठे। इससे गांव में मातम का माहौल है।
विनाशकारी बाढ़ ने चपेट में ले लिया
केदारनाथ गया सारकोट गांव का ही देवेंद्र (21) पुत्र राजे सिंह 24 को सकुशल घर लौट आया है। 16-17 जुलाई की विनाशलीला बयां करते हुए उसने बताया कि गांव के सात युवकों के साथ वह भी केदारनाथ स्थित केदार मिष्ठान भंडार और भोजनालय में काम कर रहा था। उसके साथी गांव के सात युवकों को विनाशकारी बाढ़ ने चपेट में ले लिया।
विज्ञापन
वह होटल मालिक के पुत्र के साथ बड़ी मुश्किल से छत पर चढ़ गया। और फिर दूसरे भवनों में कूदकर उसने जान बचाई। केदारनाथ के केदार मिष्ठान भंडार एवं भोजनालय में काम करने वाले 20 व्यक्तियों के सोबन (37) पुत्र सुनार सिंह के दो बच्चों में सबसे छोटा तीन माह का है।
विज्ञापन
उसे पता नहीं कि पिता की छांव क्या होती है। प्रेम सिंह (30) मकर सिंह की 4 पुत्रियां हैं। इनमें सबसे छोटी सात माह की है। भीम सिंह (28) के तीन बच्चों में सबसे छोटा छह माह का है।
पुत्री और पत्नी को छोड़ गया
कल्याण सिंह (34) पुत्र राम सिंह के दो बच्चे हैं राम सिंह का ही दूसरा लड़का हयात सिंह (25) दो पुत्रियों को छोड़ प्रलय की भेंट चढ़ गया है। राजे सिंह (30) स्व. कमाल सिंह असहाय पुत्री और पत्नी को छोड़ गया है। तो दसवीं की परीक्षा देकर पिता विहीन धर्म सिंह पढ़ाई का खर्च निकालने केदारानाथ धाम गया था।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
उसके बूढे दादा दादी झगड़ सिंह और सौंणी देवी को कहां पता था कि पढ़ाई के खर्च के स्थान पर उनका पोता सदा के लिए चला जाएगा। और उन्हें उसका तपैण करना पड़ा।
सारकोट निवासी राजे सिंह नेगी और बलवंत सिंह ने उपजिलाधिकारी से सातों युवाओं को प्रत्यक्षदर्शी देवेंद्र सिंह के अनुसार मृत घोषित करने और पीड़ित परिवारों को अतिशीघ्र मुआवजे और सहायता की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि सातों युवाओं का रीति रिवाज के अनुसार क्रियाकर्म कर दिया गया है।
छत की सरिया बनी तारणहार
केदारनाथ में आई महाप्रलय से लौटे देवेंद्र ने त्रासदी के बारे में बताया कि 16 जून की सांय आठ बजे बाढ़ आयी लेकिन वह अधिक तेज नही थी। लेकिन 17 जून की प्रात: सात बजे मौत का जो मंजर था वह केदारनाथ में तबाही ला गया। प्रलयकारी जलराशि के बढ़ते सैलाब के बीच भागो-भागो की आवाजों के साथ केदार भोजनालय में काम करने वाले 20 लोग मेजों पर चढ़ गए।
वह स्वयं छत की सरिया पर झूल गया। पानी के रेले ने मेज बहा लिए और उसमें चढ़े लोग भी उसके साथ बह गए। वह भी पानी में डूब रहा था लेकिन सरिया पकड़ा होने से पानी का आधार लेकर छत पर छलांग लगा गया। वहां होटल मालिक का बेटा आशीष भी था।
हवाई सेवा में रेस्क्यू किया गया
दोनों ने दूसरे भवनों में कूद कर जान बचाई। देवेंद्र के अनुसार 20 होटल कर्मियों में से 8 बचने में सफल रहे। जबकि 12 को बाढ़ निगल गई। दुर्भाग्य से उसमें सारकोट के 7 युवा भी थे। छह दिन जीवन मौत के संघर्ष से जूझते देवेंद्र को 22 जून को अन्य यात्रियों के साथ केदारनाथ से हवाई सेवा में रेस्क्यू किया गया।