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वर्ल्ड चैंपियनशिप पर परिमार्जन की नजर
Dehradun
Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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देहरादून। महज तेरह साल छह महीने की उम्र में ही अपना पहला ग्रैंड मास्टर खिताब जीतने वाले परिमार्जन नेगी को सबसे कम उम्र में ही अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। अब उनका ध्यान अगस्त में नार्वे में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है। एशियन चैंपियन बनने के साथ ही उन्होंने इस चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया था। अब वर्ल्ड चैंपियनशिप का विजेता बनने के लिए वह बेल्जियम में तीन माह का विशेष प्रशिक्षण लेंगे।
शतरंज के धुरंधर परिमार्जन नेगी (19 वर्ष) शुक्रवार को दून में थे। इस दौरान अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी उपलब्धियां और तैयारियां साझा की। उन्होंने कहा कि वह देश में शतरंज को बढ़ावा देना चाहते हैं और इसके लिए प्रयास करते रहेंगे। फिलहाल उनकी नजर शतरंज के वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है जो अगस्त में आयोजित होनी है। इसके लिए वे तीन माह के लिए बेल्जियम जा रहे हैं। वहां पर वे ट्रेनिंग करेंगे साथ ही मैच भी खेलेंगे। इसके बाद भारत वापस आकर अपनी ट्रेनिंग जारी रखेंगे। परिमार्जन के पिता जेबीएस नेगी ने बताया कि उसके खेल को बुलंदी पर पहुंचाने के लिए उत्तराखंड से जुड़े प्रशिक्षकों का बहुत योगदान रहा है। इसमें जीबी जोशी, डीएस नेगी का नाम शामिल है। उन्होंने बताया कि बचपन से परिमार्जन की मेमोरी काफी तेज थी। बाहरवीं कक्षा में उसके 92 प्रतिशत अंक थे, जबकि साइकोलॉजी में सौ में सौ नंबर थे। उनकी सफलता में माता परिधि धस्माना का भी काफी बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि परिमार्जन नेगी रविवार को डीएवी कालेज में सुबह 11 बजे खेल प्रेमियों से मुलाकात करेंगे।
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शतरंज के धुरंधर परिमार्जन नेगी (19 वर्ष) शुक्रवार को दून में थे। इस दौरान अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी उपलब्धियां और तैयारियां साझा की। उन्होंने कहा कि वह देश में शतरंज को बढ़ावा देना चाहते हैं और इसके लिए प्रयास करते रहेंगे। फिलहाल उनकी नजर शतरंज के वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है जो अगस्त में आयोजित होनी है। इसके लिए वे तीन माह के लिए बेल्जियम जा रहे हैं। वहां पर वे ट्रेनिंग करेंगे साथ ही मैच भी खेलेंगे। इसके बाद भारत वापस आकर अपनी ट्रेनिंग जारी रखेंगे। परिमार्जन के पिता जेबीएस नेगी ने बताया कि उसके खेल को बुलंदी पर पहुंचाने के लिए उत्तराखंड से जुड़े प्रशिक्षकों का बहुत योगदान रहा है। इसमें जीबी जोशी, डीएस नेगी का नाम शामिल है। उन्होंने बताया कि बचपन से परिमार्जन की मेमोरी काफी तेज थी। बाहरवीं कक्षा में उसके 92 प्रतिशत अंक थे, जबकि साइकोलॉजी में सौ में सौ नंबर थे। उनकी सफलता में माता परिधि धस्माना का भी काफी बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि परिमार्जन नेगी रविवार को डीएवी कालेज में सुबह 11 बजे खेल प्रेमियों से मुलाकात करेंगे।
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