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पहाड़ से महिलाओं का गहरा नाता, परेशानी भी बहुत
Dehradun
Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
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देहरादून। पहाड़ से महिलाओं का नाता सबसे गहरा है, लिहाजा सबसे ज्यादा दिक्कतें भी वही झेल रही हैं। पानी के लिए उन्हें कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। पेड़ कटने से जल संरक्षण संभव नहीं हो पा रहा। जरूरत इस बात की है कि वनों को बचाया जाए ताकि महिलाओं को बल मिले। विश्व पर्वत दिवस पर महिलाएं और वन संदर्भ उत्तराखंड पर संगोष्ठी हुई। सड़क बनाने के लिए जंगल न काटे जाने की बात कही गई।
विख्यात पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट स्लाइड के जरिए राज्य में पौध रोपण की तस्वीर दिखाई। बताया कि चिपको आंदोलन के बाद से तकरीबन 30 साल की बात करें तो यहां पौध रोपण में छह प्रतिशत की दर से इजाफा दर्ज किया गया है। पर्यावरणविद् और पर्वतारोही हेमवंती बिष्ट ने गंगोत्री ग्लेशियर के घटने की बात कह सभी को चिंता में डाल दिया। कहा कि इस क्षेत्र में स्नो लेपर्ड भी नजर आया है। यह संतोष की बात है, लेकिन इसके संरक्षण की बेहद आवश्यकता है।
सच्चिदानंद भारती ने पौड़ी में लगाए गए दो लाख पौधों की कहानी स्लाइड शो के माध्यम से बताई। कहा कि अगर अधिकारी चौकस रहें तो आंदोलन की जरूरत ही न पड़े। पानी के स्रोत तभी बचे रहेंगे जब जंगल बचे रहेंगे। पहाड़ बचा रहेगा। इस संबंध में समन्वित प्रयास की बात दोहराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे ने की। इस अवसर पर संगोष्ठी की आयोजक दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर बीके जोशी, मनोज पंजवानी आदि भी उपस्थित रहे।
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विख्यात पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट स्लाइड के जरिए राज्य में पौध रोपण की तस्वीर दिखाई। बताया कि चिपको आंदोलन के बाद से तकरीबन 30 साल की बात करें तो यहां पौध रोपण में छह प्रतिशत की दर से इजाफा दर्ज किया गया है। पर्यावरणविद् और पर्वतारोही हेमवंती बिष्ट ने गंगोत्री ग्लेशियर के घटने की बात कह सभी को चिंता में डाल दिया। कहा कि इस क्षेत्र में स्नो लेपर्ड भी नजर आया है। यह संतोष की बात है, लेकिन इसके संरक्षण की बेहद आवश्यकता है।
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सच्चिदानंद भारती ने पौड़ी में लगाए गए दो लाख पौधों की कहानी स्लाइड शो के माध्यम से बताई। कहा कि अगर अधिकारी चौकस रहें तो आंदोलन की जरूरत ही न पड़े। पानी के स्रोत तभी बचे रहेंगे जब जंगल बचे रहेंगे। पहाड़ बचा रहेगा। इस संबंध में समन्वित प्रयास की बात दोहराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे ने की। इस अवसर पर संगोष्ठी की आयोजक दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर बीके जोशी, मनोज पंजवानी आदि भी उपस्थित रहे।
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